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Deepak: हिंदू धर्म में दीपक जलाने का महत्व है? एक मुखी से लेकर नौ मुखी के फायदे... दीया जलाने के क्या हैं नियम?

हिंदू धर्म में दीया जलाने की परंपरा काफी पुरानी है. इसमें कुछ दीपक तो केवल पूजा के लिए जलाए जाते हैं, तो वहीं कुछ खास मान्यताओं की पूर्ति के लिए. इसले अलावा दीया जलाने को लेकर भी कुछ खास नियम हैं, जिनका पता होना काफी जरूरी है.

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gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान दीपक जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है. घर हो या मंदिर, किसी भी शुभ काम की शुरुआत दीपक जलाकर की जाती है. दीपक को केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि आस्था और सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपक की लौ में भगवान का प्रकाश देखा जाता है. यही वजह है कि दिवाली के त्योहार को दीपों का पर्व कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूजा में अलग-अलग मुख वाले दीपक जलाने का क्या महत्व है और किस मनोकामना के लिए कौन सा दीपक जलाना चाहिए?

हिंदू धर्म में दीपक जलाने का क्या है महत्व?

हिंदू परंपरा में पृथ्वी, जल, अग्नि, आकाश और वायु को पांच महत्वपूर्ण तत्व माना गया है. इन सभी में अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता है. दीपक इसी अग्नि का प्रतीक है. धार्मिक मान्यता है कि दीपक जलाने से मन शांत और एकाग्र होता है. इससे पूजा और मंत्र जाप में ध्यान लगाने में मदद मिलती है. दीपक की रोशनी अंधकार को दूर करने के साथ जीवन में ज्ञान और सकारात्मकता का संदेश भी देती है.

एक मुखी दीपक जलाने के फायदे

एक मुखी दीपक का इस्तेमाल आमतौर पर रोजाना पूजा-पाठ और मंत्र जाप के लिए किया जाता है. इसे घर के पूजा स्थान पर जलाना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दीपक को जलाकर भगवान की पूजा करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है. कार्तिक महीने में रोज शाम को पूजा घर में एक मुखी दीपक जलाना अच्छा माना जाता है.

चार मुखी दीपक क्यों जलाया जाता है?

चार मुखी दीपक को विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए जलाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसे धन प्राप्ति, ग्रहों से जुड़ी परेशानियों को कम करने और विशेष पूजा के लिए उपयोग किया जाता है. इस दीपक में दो बातियां रखकर उनके चारों सिरों को जलाया जाता है. कार्तिक महीने में तुलसी के पौधे के नीचे घी का चार मुखी दीपक जलाना शुभ माना जाता है.

दो, पांच और नौ मुखी दीपक का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दो मुखी दीपक शत्रुओं और विरोधियों से जुड़ी परेशानियों को शांत करने के लिए जलाया जाता है. पांच मुखी दीपक संतान की पढ़ाई, ज्ञान और उन्नति की कामना के लिए उपयोग किया जाता है. वहीं, नौ मुखी दीपक कर्ज से राहत और मुकदमे से जुड़ी परेशानियों में मुक्ति की कामना के लिए जलाया जाता है.

पूजा में घी और तेल का दीपक कब जलाएं?

मां काली, भैरव बाबा और यम देवता की पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा है. तिल के तेल का दीपक भी कई देवी-देवताओं की पूजा में जलाया जा सकता है. वहीं, मां लक्ष्मी की पूजा और विशेष अनुष्ठान में घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जलते हुए दीपक को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाना चाहिए. पूजा पूरी होने पर दीपक को अपने आप बुझने देना बेहतर है. 

 

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