सावन में कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु के अपने-अपने संकल्प और विश्वास की कहानी भी होती है. कोई परिवार की खुशहाली के लिए कांवड़ उठाता है तो कोई संतान की सफलता और सुख-समृद्धि की कामना करता है. इसी बीच प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पर एक ऐसा परिवार मिला, जिसने पिछले 10 वर्षों से सिर्फ एक ही संकल्प के साथ कांवड़ उठाई है. परिवार हमेशा एकजुट रहे, रिश्तों में प्रेम और भाईचारा बना रहे. इस बार भी परिवार के 10 सदस्य 11वें वर्ष की कांवड़ यात्रा पर एक साथ बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हुए.
प्रयागराज से गंगाजल लेकर बैद्यनाथ धाम के लिए हुए रवाना
उत्तर प्रदेश के कौशांबी निवासी नीरज पांडे अपने पूरे परिवार के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पहुंचे. यहां सभी सदस्यों ने मां गंगा में स्नान किया, विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लेकर कांवड़ में गंगाजल भरा. इसके बाद पूरा जत्था 'बोल बम' के जयघोष के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए रवाना हो गया. खास बात यह है कि इस यात्रा में शामिल सभी 10 लोग एक ही परिवार के सदस्य हैं और सभी आपस में सीधे रिश्ते से जुड़े हुए हैं.
'भोलेनाथ की कृपा से परिवार में बना हुआ है प्रेम और सौहार्द'
परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे किसी व्यक्तिगत इच्छा या भौतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशहाली और एकता की कामना लेकर हर साल बाबा के दरबार जाते हैं. उनका कहना है कि पिछले 10 सालों में भोलेनाथ की कृपा से परिवार में प्रेम, शांति और आपसी विश्वास लगातार मजबूत हुआ है. इसी आस्था के साथ इस वर्ष भी उन्होंने 11वीं बार कांवड़ यात्रा शुरू की है, ताकि भविष्य में भी परिवार पर किसी तरह का संकट न आए और रिश्तों की डोर हमेशा मजबूत बनी रहे.
पूरा परिवार एक साथ निभा रहा परंपरा
नीरज कुमार पांडे बताते हैं कि इस यात्रा में उनके दादा, बड़े भाई, बाबा, दो बड़ी बहनें समेत परिवार के कई सदस्य शामिल हैं. उनका कहना है कि पूरा परिवार वर्षों से इस परंपरा को निभा रहा है और भोलेनाथ की कृपा से सभी सुखी और स्वस्थ हैं. उनका विश्वास है कि जब परिवार एक साथ भगवान की भक्ति करता है तो रिश्तों में विश्वास और अपनापन और अधिक मजबूत होता है. यही वजह है कि हर साल पूरा परिवार एक साथ कांवड़ यात्रा पर निकलता है.
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