आज आषाढ़ मास की अमावस्या है. सनातन धर्म में माना जाता है कि इस दिन का पितरों के लिए विशेष धार्मिक महत्व है. यह तिथि पितरों के तर्पण, स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा भाव से किए गए पितृ कर्मों से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है. साथ ही जीवन की कई बाधाएं भी दूर होती हैं. इस साल आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जा रही है.
कब है आषाढ़ अमावस्या? जानें तिथि
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत कल यानी 13 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 49 मिनट से हुई थी और इसका समापन 14 जुलाई 2026 को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर 14 जुलाई को ही आषाढ़ अमावस्या का व्रत, स्नान, दान और पितृ तर्पण करना शुभ माना गया है.
स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर पूर्वाह्न तक स्नान और दान करना सबसे शुभ माना जाता है.
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त
आज सुबह 5 बजकर 32 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 45 मिनट तक रहेगा. ये समय स्नान और तर्पण के लिए बेहद भाग्यशाली माना जाता है. इस दिन पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करने के बाद जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, काले तिल, छाता, जल से भरा घड़ा या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना पुण्यदायी माना गया है.
कुतुप काल
पितरों के पूजन का शुभ समय दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. माना जाता है कि इस मुहूर्त में पितरों का ध्यान और पूजा करने से घर में शांति आती है. साथ ही सुख-धन की कमी पूरी होती है. पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है.
आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें. इसके बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य दें. यदि संभव हो तो पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर में गंगाजल मिले जल से स्नान किया जा सकता है. इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें और उनका स्मरण करते हुए पूजा करें. जरूरतमंदों को दान दें और अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा पितरों की पूजा-अर्चना करें.
आषाढ़ अमावस्या का महत्व
आषाढ़ अमावस्या को पितरों की शांति और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन तर्पण, पिंडदान, स्नान और दान करने से पितृ दोष शांत होता है और परिवार पर पूर्वजों की कृपा बनी रहती है. इसके साथ ही जीवन में आने वाली कई परेशानियां दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है.
इस दिन क्या करें?
आषाढ़ अमावस्या पर पितरों का तर्पण करें, गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें, पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं और पूर्वजों का स्मरण करें. धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए ये कार्य कई गुना पुण्य फल प्रदान करते हैं और पितरों की कृपा बनाए रखते हैं.
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