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जैसे ही लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचता है बाढ़ का पानी, शंख-घंटों के बीच मां गंगा का होता है स्वागत, सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम

जब मां गंगा का जल बढ़ते-बढ़ते संगम के प्राचीन लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचता है और भगवान बजरंगबली का स्नान कराता है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है.

Lete Hanuman Temple
पंकज श्रीवास्तव
  • प्रयागराज,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

जहां एक ओर गंगा और यमुना का बढ़ता जलस्तर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए चिंता का कारण बनता है, वहीं संगम नगरी प्रयागराज में यही बढ़ता जलस्तर आस्था और श्रद्धा का प्रतीक बन जाता है. जैसे ही बाढ़ का पानी लेटे बजरंगबली मंदिर के पास पहुंचता है तो मां गंगा का स्वागत किया जाता है और आरती उतारी जाती है.

मां गंगा का विधि-विधान से पूजन 
मान्यता है कि जब मां गंगा लेटे हनुमान मंदिर पहुंचकर बजरंगबली का जलाभिषेक करती हैं, तब यह पूरे देश में सुख, शांति और समृद्धि का संदेश लेकर आता है. इसी विश्वास के साथ मां गंगा का विधि-विधान से पूजन और भव्य आरती की जाती है. यह परंपरा सदियों पुरानी है.

प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. जहां नदी किनारे बसे निचले इलाकों के लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं और प्रशासन बाढ़ से निपटने की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर संगम नगरी में इस प्राकृतिक घटना को आस्था के पर्व के रूप में देखा जाता है.

Lete Hanuman Temple

मां गंगा हनुमान जी का अभिषेक करने आती हैं
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब मां गंगा का जल बढ़ते-बढ़ते संगम के प्राचीन लेटे हनुमान मंदिर तक पहुंचता है और भगवान बजरंगबली का स्नान कराता है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां गंगा स्वयं अपने पुत्र समान हनुमान जी का अभिषेक करने आती हैं और उनका यह आगमन देश-दुनिया में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संदेश देता है.

इसी पावन अवसर पर मंदिर परिसर में मां गंगा का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा की आरती उतारी जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस दिव्य दृश्य के साक्षी बनते हैं. भक्त गंगा मैया से प्रदेश और देश की खुशहाली, अच्छी वर्षा, समृद्धि और सभी के कल्याण की कामना करते हैं. लेटे हनुमान मंदिर की यह परंपरा वर्षों पुरानी है और हर वर्ष गंगा का जल मंदिर तक पहुंचने पर श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिलता है.

आस्था और प्रकृति के अद्भुत संगम का यह दृश्य प्रयागराज की धार्मिक विरासत को जीवंत करता है. मां गंगा का यह वार्षिक आगमन केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और सनातन परंपरा का प्रतीक मानी जाती है.

वही अभी दोनों नदियों का जलस्तर धीरे -धीरे बढ़ रहा है और जब मंदिर के पास बाढ़ का पानी पहुंचेगा और मां गंगा अपने पुत्र हनुमान को जब स्नान कराएंगी वह दृश्य भी आपको दिखाएंगे लेकिन इसके लिए आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा.

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