Ganga Dussehra 2026: आज है गंगा दशहरा, जानें आस्था की डुबकी लगाने से किन 10 पापों से मुक्ति दिलाती है मां गंगा?

Ganga Dussehra: गंगा दशहरा का पावन पर्व 25 मई दिन सोमवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के 10 प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं. यहां आप जान सकते हैं मां गंगा किन 10 पापों से मुक्ति दिलाती हैं?

Ganga Dussehra 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 25 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:44 AM IST

सनातन धर्म में गंगा नदी विशेष महत्व है. मां गंगा को मोक्षदायिनी और पावन नदी माना गया है. हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन राजा भागीरथ के कठिन तप से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं. इस साल गंगा दशहरा का पावन पर्व 25 मई दिन सोमवार को धूमधाम से मनाया जा रहा है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने से व्यक्ति के 10 प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं. 

क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा का पर्व?
धार्मिक कथाओं के मुताबिक धरती पर आने से पहले मां गंगा ब्रह्मा जी के कमंडल में निवास करती थीं. राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और उद्धार के लिए वर्षों तक कठिन तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने पृथ्वी पर आना स्वीकार किया. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं. राजा भगीरथ के भगीरथ प्रयासों के कारण ही इस पावन दिन को गंगा दशहरा या भगीरथी जयंती के रूप में भी जाना जाता है.

क्या है दशविध पाप यानी 10 पापों का रहस्य?
दशहरा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. पहला दश (दस) और दूसरा हरा (हरने वाला), यानी दस पापों को हरने वाला. गरुड़ पुराण और मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों में इंसानी गलतियों या पापों को मन, वाणी और कर्म के आधार पर 10 भागों (3 कायिक यानी शारीरिक, 4 वाचिक यानी वाणी के और 3 मानसिक पाप) में बांटा गया है. धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गंगा दशहरा के दिन गंगा में डुबकी लगाने या मां गंगा का स्मरण करने से इन 10 पापों का प्रभाव समाप्त हो जाता है. यदि कोई गंगा नदी नहीं जा सकता तो उसे घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए. 

1. मन द्वारा किए जाने वाले पाप (मानसिक पाप)
परद्रव्येष्वभिध्यानम्: किसी दूसरे की संपत्ति या धन को हड़पने का विचार मन में लाना.
मनसानिष्टचिंतनम्: मन ही मन किसी का बुरा सोचना या किसी के प्रति दुर्भावना रखना.
वितथाभिनिवेशश्च: असत्य या अधर्म की बातों को सही मानना और उसी पर अड़े रहना.

2. वाणी द्वारा किए जाने वाले पाप (वाचिक पाप)
पारुष्यम्: किसी को अत्यंत कठोर या कड़वे वचन बोलना, जिससे उसका दिल दुखे.
अनृतम्: झूठ बोलना या किसी को धोखा देने के लिए असत्य का सहारा लेना.
पैशुन्यम्: किसी की पीठ पीछे उसकी बुराई या चुगली करना.
असंबद्ध प्रलाप: बिना किसी कारण या बिना सोचे-समझे व्यर्थ और अनर्गल बातें करना.

3. शरीर या कर्म द्वारा किए जाने वाले पाप (कायिक पाप)
अदत्तादानम्: बिना अनुमति के किसी की वस्तु लेना या चोरी करना.
हिंसा: किसी भी जीव को शारीरिक या मानसिक रूप से कष्ट पहुंचाना या उसकी हत्या करना.
परदारोपसेवा: शास्त्रों के विरुद्ध या अनैतिक शारीरिक संबंध बनाना.

मां गंगा होंगी मनुष्यों के उद्धार का सबसे सरल मार्ग 
स्कंद पुराण के काशी खंड के साथ निर्णय ग्रंथ निर्णयसिंधु में भी गंगा दशहरा पर 10 पापों की मुक्ति का जिक्र किया गया है. स्कंद पुराण में भगवान शिव ने स्वयं भगवान विष्णु से कहा है कि कलयुग में जहां क्रोध, लोभ और अहंकार का बोलबाला होगा, वहां मां गंगा मनुष्यों के उद्धार का सबसे सरल मार्ग होंगी. महाभारत में कहा गया है कि गंगा स्नान का लाभ तभी प्राप्त होता है जब व्यक्ति अंदर पश्चातप की भावना हो. विद्वानों का मानना है कि पाप मुक्ति का लाभ तभी मिलता है, जब मनुष्य अपने कर्मों के प्रति सच्चे मन से पश्चाताप करे और भविष्य में उन्हें न दोहराने का संकल्प ले. गंगा दशहरा का असल मतलब यह है कि मनुष्य नदी के ठंडे पानी में डुबकी लगाते समय इन 10 विकारों को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़ने का संकल्प ले. 


 

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