गणेश उत्सव के रंग में इन दिनों पूरा छत्तीसगढ़ रंगा हुआ है. शहरों से लेकर गांवों तक गणपति बप्पा की स्थापना कर श्रद्धालु भक्ति में लीन हैं. लेकिन गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक ऐसा गणेश मंदिर है, जहां भगवान गणेश को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यताएं इसे खास बनाती हैं. पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग पर कारीआम में स्थित स्वयंभू गणेश दादा मंदिर इन दिनों भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है.
सिंदूरी रंग में विराजमान भगवान गणेश-
सिंदूरी रंग में विराजमान गणेश दादा और दर्शन के लिए उमड़ते श्रद्धालु गणेश उत्सव के दौरान कारीआम का यह मंदिर भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आ रहा है.
स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां भगवान गणेश स्वयंभू रूप में विराजमान हैं और बजरंग बली की तरह सिंदूरी चोला में हैं, श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से गणेश दादा के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी आस्था के चलते गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के साथ बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त यहां पहुंचते हैं.
गणेश मूर्ति का आकार बढ़ने का दावा-
मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता यह भी है कि यहां विराजमान गणेश प्रतिमा का आकार समय के साथ बढ़ता रहा है. श्रद्धालु इसे भगवान गणेश का चमत्कार मानते हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में सुबह-शाम विशेष पूजा-अर्चना होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
मनोकामना पूरी होने की आस लेकर भक्त यहां नारियल बांधकर और लड्डूओ अर्पण कर मन्नत मांगते हैं. विशेष रूप से संतान प्राप्ति सहित अन्य मनोकामनाओं के लिए यहां मन्नत मांगने की परंपरा बताई जाती है.
लड्डू, मोदक और नारियल का लगता है भोग-
कारीआम का यह मंदिर केवल गणेश भक्ति तक सीमित नहीं है. मंदिर परिसर में कालचुरी काल से जुड़ी श्री काली माता और प्राचीन शिवलिंग सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी मौजूद हैं. यही वजह है कि यह स्थान स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में लड्डू, मोदक और नारियल का भोग चढ़ाने के साथ विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं. सालभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन गणेश उत्सव के दिनों में भक्ति और श्रद्धा का माहौल देखते ही बनता है. प्राकृतिक खूबसूरती से घिरे जीपीएम जिले में कारीआम का स्वयंभू गणेश दादा मंदिर आस्था की एक ऐसी पहचान है, जहां गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भक्ति अपने चरम पर पहुंच जाती है. गणपति बप्पा के जयकारों के बीच यहां पहुंचने वाला हर भक्त अपने साथ आस्था और विश्वास की एक नई अनुभूति लेकर लौटता है.
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