गुरु पूर्णिमा का पर्व हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है. यह पर्व हिन्दू धर्म में खास महत्व रखता है. यह दिन गुरु, शिक्षक और जीवन में सही रास्ता दिखाने वाले लोगों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित होता है. इस साल गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन महर्षि वेद व्यास की जयंती और गुरु-शिष्य परंपरा से भी जुड़ा हुआ है. इसलिए इसे पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है.
पंचांग के अनुसार, इस साल पूर्णिमा तिथि 28 जुलाई, मंगलवार को शाम 6:18 बजे शुरू होगी. यह तिथि 29 जुलाई, बुधवार को रात 8:05 बजे समाप्त होगी. क्योंकि 29 जुलाई को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि रहेगी, इसलिए गुरु पूर्णिमा का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा.
क्यों मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था. उन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की. इसलिए उन्हें भारत के सबसे बड़े गुरुओं में गिना जाता है. इस दिन लोग महर्षि वेद व्यास को भी श्रद्धा से याद करते हैं.
भगवान शिव से भी जुड़ी है यह मान्यता
योग परंपरा के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने सप्तऋषियों को योग का ज्ञान दिया था. इसके बाद उन्हें पहला गुरु यानी आदियोगी माना गया. इसलिए यह दिन गुरु और शिष्य के रिश्ते का भी प्रतीक माना जाता है.
क्या है इस दिन का महत्व
गुरु पूर्णिमा वह दिन है जब आदियोगी भगवान शिव ने पहली बार अपने ज्ञान को सप्तऋषियों के साथ साझा किया था. तभी से गुरु परंपरा की शुरुआत मानी जाती है. गुरु पूर्णिमा का संदेश हमें अपने गुरु और शिक्षकों का सम्मान करने और उनके दिए ज्ञान के लिए धन्यवाद देने की प्रेरणा देता है. इस दिन कई लोग अपने गुरु का आशीर्वाद लेते हैं, पूजा करते हैं और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेते हैं.
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