सावन का कांवड़ मेला है और बड़ी संख्या में कावड़िये हरिद्वार से गंगाजल लेकर रवाना हो रहे हैं. इस बीच एक अनोखा कांवड़ देखने को मिला. हर कोई इस अनोखे कांवड़ को देखकर हैरान है. ये स्पेशल कांवड़ नोटों से बनी है.
नोटों वाली कांवड़-
दिल्ली से आए कांवड़िए हर की पौड़ी से जल भरकर निकल रहे हैं. इसमें से एक कावड़िया दीपांशु कांवड़ लेकर दिल्ली तक लेकर चलेंगे. इसकी नोट वाली कांवड़ लेकर जाने के पीछे कोई मनोकामना नहीं है. दीपांशु पिछले साल जब कांवड़ लेने आए थे तो उसने तय किया था इस बार नोटों वाली कांवड़ लेकर जाएगा. इस बार नोटों वाली कांवड़ लेकर जाते हुए दीपांशु ने भोलेनाथ से मन्नत मांगी है और मन्नत पूरी होगी तो अगले साल इससे भी बड़ी और ज्यादा नोटों वाली कांवड़ लेकर जाएंगे.
अनोखे कांवड़ में कितने के नोट?
इस कांवड़ में कितने नोट लगे हैं, ये किसी को नहीं पता है. कांवड़ में जितने नोट लगे, वह लगाते चले गए. इसमें 100 के नोट भी है, 50 के नोट भी है, 20 के नोट भी है और 10 के नोट भी है. बारिश से नोट खराब न हो, इसके लिए कांवड़ पर पन्नी लगाई गयी है. कांवड़ में लगे नोटों को शिवालय में दान दिया जाएगा. उससे भंडारा होगा या फिर किसी की मदद होगी. इस कांवड़ को बनाने में एक दिन, एक रात लगा और बनाने में 9 व्यक्ति लगे, तब जाकर यह कांवड़ पूरी हुई.
मेरा सपना पूरा हुआ- दीपांशु
दीपांशु का कहना है कि मैंने अभी हरिद्वार से कांवड़ उठायी है और मैं हर्ष विहार दिल्ली जा रहा हूं. मेरा सपना था कि नोट वाली कांवड़ ले जाने का और इसलिए आज नोट वाली कांवड़ लेकर जा रहा हूं. मेरे पीछे जो कांवड़ है, इसमें अनगिनत नोट है. इसकी कोई गिनती नहीं है.
उन्होंने कहा कि बस भोले बाबा के प्यार में यह कांवड़ लेकर के जा रहे हैं, हम चार लोग हैं और यह कांवड़ मैं चलाऊंगा, एक कंधे की कांवड़ है, नोट की मेरी पहली कांवड़ है, इसके पहले पिछले साल मैं कांवड़ लेकर आया था.
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