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हरिद्वार में संतों ने खेली अनोखी होली, एक दूसरे को पंचगव्य लगाकर दी शुभकामनाएं

संतों ने पहले विधिवत पूजा-अर्चना की और उसके बाद एक-दूसरे को रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं. भजन-कीर्तन और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा.

Haridwar Saints celebrated Holi
gnttv.com
  • हरिद्वार,
  • 27 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:32 PM IST

फाल्गुन मास में जहां देशभर में बरसाना की लठमार और मथुरा की फूलों वाली होली की धूम मची है, वहीं हरिद्वार में संतों ने आस्था और परंपरा से जुड़ी अनोखी होली खेली. शुक्रवार को हरिद्वार के जूना अखाड़ा स्थित माया देवी मंदिर प्रांगण में निरंजनी अखाड़ा और जूना अखाड़ा के संतों ने पारंपरिक रंगों के साथ-साथ गाय के गोबर से बने पंचगव्य से होली खेलकर खास संदेश दिया.

एक दूसरे को गोबर लगाकर दी शुभकामनाएं
संतों ने पहले विधिवत पूजा-अर्चना की और उसके बाद एक-दूसरे को रंग और गोबर लगाकर शुभकामनाएं दीं. भजन-कीर्तन और हर-हर महादेव के जयकारों के बीच पूरा परिसर भक्तिमय हो उठा. संतों का कहना था कि यह सिर्फ रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने का अवसर है.

गोबर की होली से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्री महंत रवींद्र पुरी, महामंत्री स्वामी हरिगिरि महाराज और जगद्गुरु चक्रपाणि महाराज ने कहा कि गोबर होली सनातन परंपरा का प्रतीक है. हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और उसका गोबर भी पवित्र माना जाता है.

संतों के अनुसार, गोबर से होली खेलने का उद्देश्य प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है. उनका कहना था कि रासायनिक रंगों की बजाय प्राकृतिक और पारंपरिक तरीकों से होली मनाना हमारी संस्कृति की विशिष्ट पहचान है.

संत समाज ने किया देशवासियों से आह्वान
संतों ने कहा कि होली का पर्व समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करता है. गोबर होली के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि हमें अपनी परंपराओं को संजोकर रखना चाहिए और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीना चाहिए.

-मुदित कुमार अग्रवाल

 

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