हरियाली तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली हरियाली तीज इस बार 15 अगस्त, शनिवार को पड़ रही है. इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं, कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से यह व्रत करती हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. हालांकि, व्रत के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है.
हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए
हरियाली तीज के दिन व्रत महिलाओं को देर तक सोने से बचना चाहिए.
इस दिन घर में तामसिक भोजन नहीं बनाना चाहिए और सात्विक भोजन का ही सेवन करना चाहिए.
व्रत रखने वाली महिलाओं को नमक और अन्न का सेवन नहीं करने की परंपरा है. हालांकि, गर्भवती या बीमार महिलाओं को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से फल आदि का सेवन कर सकती हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज पर काले, नीले और सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए. इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. इसके अलावा मन में क्रोध, लालच या नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए. पति के साथ विवाद या बहस करने से भी बचना चाहिए.
मान्यता है कि हरियाली तीज पर दूध का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही, व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद करने की परंपरा है.
हरियाली तीज पर क्या करना चाहिए
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए कपड़े पहनें. सुहागिन महिलाओं के लिए मायके से सिंधारा आने की परंपरा है, जिसमें कपड़े और श्रृंगार का सामान दिया जाता है. हरी साड़ी, मेहंदी और हरी चूड़ियां पहनना इस दिन खास माना जाता है. सुहागिन महिलाएं सोलह श्रृंगार भी कर सकती हैं.
व्रत शुरू करने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके व्रत का संकल्प लें. इसके बाद विधि-विधान से पूजा करें और सुखी वैवाहिक जीवन तथा अखंड सौभाग्य की कामना करें. कई जगहों पर महिलाएं अपनी सास को सुहाग का सामान भी भेंट करती हैं.
दान का भी है खास महत्व
हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के साथ दान करने की भी परंपरा है. मान्यता के अनुसार, शिव भक्तों को भोजन कराने के बाद अपनी क्षमता के अनुसार स्वर्ण, फल, जौ या गेहूं का दान करना शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से व्रती की मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं.
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