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Hartalika Teej 2026: अगर सुबह नहीं कर पाईं तीज की पूजा तो इस काल में भी करना होगा शुभ, शाम से भद्रा काल! जानें क्या पड़ेगा पूजा या पारण पर असर?

14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का दुर्लभ संयोग बना है. शाम को भद्रा काल शुरू होगा, लेकिन क्या इसका असर पर्व पर पड़ेगा? वहीं अगर छूट गई है सुबह की पूजा तो दोपहर व प्रदोष काल में है पूजन का शुभ मुहूर्त.

Hartalika Teej 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:32 AM IST

आज यानी 14 सितंबर 2026, सोमवार को हरतालिका तीज का व्रत रखा जा रहा है. इस बार का दिन कई वजहों से खास है, क्योंकि इसी दिन गणेश चतुर्थी भी है और सोमवार होने की वजह से भगवान शिव की पूजा का महत्व भी बढ़ जाता है. इसके साथ ही शाम से भद्रा काल भी शुरू होगा, जिसे लेकर कई लोगों के मन में पूजा और पारण को लेकर कई सवाल आ रहे हैं. हालांकि, इस बार भद्रा का वास पृथ्वी लोक में नहीं माना जा रहा है, इसलिए तीज के व्रत और पूजा पर इसका असर नहीं पड़ेगा.

आज ही क्यों रखी जा रही है हरतालिका तीज?
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे शुरू हुई थी और 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे समाप्त हो गई. उदया तिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर को रखा जा रहा है. हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित व्रत है. धार्मिक मान्यता के अनुसार महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत रखती हैं. वहीं अविवाहित लड़कियां भी मनचाहे वर की कामना से यह व्रत करती हैं.

शाम से शुरू होगी भद्रा, लेकिन डरने की जरूरत नहीं
14 सितंबर को शाम 7:20 बजे से भद्रा काल शुरू होगा. इसका समापन अगले दिन यानी 15 सितंबर की सुबह 6:06 बजे होगा. भद्रा को लेकर शुभ काम और पूजा-पाठ को लेकर चिंता रहती है. लेकिन इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार भद्रा का वास पृथ्वी लोक में नहीं रहेगा. इसलिए हरतालिका तीज की पूजा और अगले दिन पारण पर इसका कोई प्रभाव नहीं माना जा रहा है.

सुबह का समय निकल गया तो ये हैं पूजा के विकल्प
हरतालिका तीज की पूजा के लिए सुबह का समय सबसे प्रमुख माना जाता है. लेकिन अगर किसी वजह से सुबह पूजा नहीं कर पाई हैं तो दोपहर में भी पूजा की जा सकती है. इसके लिए दोपहर का मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक है. इसके अलावा प्रदोष काल में भी शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है. प्रदोष काल शाम 6:28 बजे से रात 8:47 बजे तक रहने वाला है. भद्रा शाम 7:20 बजे से शुरू होगी, लेकिन इस दौरान भद्रा का प्रभाव पृथ्वी लोक पर नहीं माना जा रहा है.

15 सितंबर को इस समय करें पारण
हरतालिका तीज का व्रत अगले दिन यानी 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद खोला जाएगा. आपके दिए समय के अनुसार पारण का समय सूर्योदय से सुबह 7:44 बजे तक रहेगा. व्रत खोलने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती को प्रणाम करें और पूजा के बाद ही पारण करें.

हरतालिका तीज की पूजा कैसे करें?
सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा वाली जगह को साफ कर लें. इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित करें. सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें. इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती को जल, पंचामृत, फूल, अक्षत, रोली और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें. माता पार्वती को सुहाग की सामग्री चढ़ाएं. इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में शिव-पार्वती की आरती करें.

पूजा की सामग्री पहले से कर लें तैयार
हरतालिका तीज की पूजा के लिए भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा, मिट्टी या रेत से बनी प्रतिमा, फूल, बेलपत्र, फल, पान, सुपारी, अक्षत, रोली, कुमकुम, मौली, धूप, दीपक और कपूर लें. इसके अलावा पंचामृत, कलश, जल, नैवेद्य और मिठाई भी पूजा में रखी जाती है. माता पार्वती के लिए साड़ी या चुनरी और सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी आदि भी शामिल करें.

क्या है हरतालिका तीज की कहानी?
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए लंबे समय तक कठोर तपस्या करती थीं. उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती का मन शिव जी में ही था. कथा के अनुसार माता पार्वती की सखियां उन्हें ऐसी जगह ले गईं, जहां वह अपने मन की इच्छा के अनुसार शिव जी की आराधना कर सकें. वहां माता ने कठोर तप किया और भगवान शिव को पति के रूप में पाने का संकल्प लिया. माता पार्वती की तपस्या और दृढ़ संकल्प से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया. इसी पौराणिक मान्यता से हरतालिका तीज का व्रत जुड़ा माना जाता है.
 

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