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पहली बार रखने जा रही हैं हरतालिका तीज का व्रत? भूलकर भी न करें ये गलतियां, जान लें पूजा और व्रत के जरूरी नियम

हरतालिका तीज कठिन व्रतों में गिना जाता है, क्योंकि मान्यता के अनुसार इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं. पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए इसके नियम जानना बेहद जरूरी है.

Hartalika Teej 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 10 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:08 AM IST

सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत सिर्फ एक उपवास नहीं, बल्कि पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से जुड़ी एक खास परंपरा है. इस दिन महिलाएं पूरे दिन बिना अन्न और जल के कठिन निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करती हैं. यही वजह है कि हरतालिका तीज को सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. खासकर जो महिलाएं पहली बार यह व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए इसके नियम जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी व्रत की परंपरा और पूजा विधि को प्रभावित कर सकती है. तो आइए जानते हैं हरतालिका तीज कब है और पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को किन जरूरी नियमों का ध्यान रखना चाहिए.

कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होगी और 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 06 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा.

माता पार्वती और भगवान शिव से जुड़ी है मान्यता
हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे, लेकिन माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में चाहती थीं. इसके बाद उनकी सखियां उन्हें घने जंगल में ले गईं, जहां माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया.

पहली बार व्रत रख रही हैं तो इन नियमों का रखें ध्यान
निर्जला व्रत

हरतालिका तीज को कठिन व्रत माना जाता है. इस दिन महिलाएं अन्न के साथ जल का भी त्याग करती हैं. इसलिए पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को पहले से मानसिक रूप से इसकी तैयारी करनी चाहिए.

16 श्रृंगार और मेहंदी
इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं. मेहंदी लगाना भी इस व्रत की परंपरा का हिस्सा माना जाता है.

सुबह से पूजा की तैयारी
व्रत रखने वाली महिलाओं को सूर्योदय से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहनने चाहिए. इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए.

पूजा सामग्री का रखें ध्यान
पूजा के दौरान शिव-पार्वती और गणेश जी को पुष्प, धूप, दीप, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित की जाती है. मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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