उत्तराखंड के चमोली में सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के कपाट आने वाली 23 मई को खुलने जा रहे हैं, जिसके लिए यात्रा मार्ग को सुगम बनाने की कवायद युद्धस्तर पर शुरू हो गई है. इसी कड़ी में बुधवार को भारतीय सेना के 16 जांबाज जवानों का पहला दल गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना कर दिया गया.
रास्तों से बर्फ हटाना सबसे बड़ी चुनौती-
कपाट खुलने से पहले धाम तक पहुंचने के रास्ते पर जमी बर्फ को हटाना ही सबसे बड़ी चुनौती है. अब भारतीय सेना के इन 16 हिम योद्धाओं ने इस रास्ते को तीर्थ यात्रियों के लिए साफ करने का बीड़ा उठाया है.
बुधवार को 9 माउंटेन ब्रिगेड के इन जवानों का पहला दल गोविंद घाट से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना कर दिया गया. यात्रा मार्ग की शुरुआती रेकी करने के बाद ये टीम भारी बर्फबारी से ढंके रास्तों को साफ करने का काम शुरू करेगी.
16 जवान बर्फ हटाने का करेंगे काम-
परंपरा के अनुसार हर साल भारतीय सेना के सहयोग से हेमकुंड साहिब के मुश्किल रास्तों से बर्फ हटाने का काम किया जाता है. पहले चरण में भेजे गए ये 16 जवान अटलाकुडी से बर्फ काटने की शुरुआत करेंगे. धीरे धीरे आगे बढ़ते हुए ये मुख्य धाम तक के रास्ते को तीर्थ यात्रियों के लिए तैयार कर देंगे. कुछ दिनों बाद 12 और जवानों की दूसरी टुकड़ी भी बर्फ हटाने के लिए भेजी जाएगी.
हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है. ऐसे में ये जवान पूरी रफ्तार से रास्ते को साफ करने का काम करेंगे. इनकी कोशिश यही है कि हेमकुंड साहिब तक पहुंचने की राह वक्त पर तीर्थ यात्रियों का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाए और यहां आने वाला हर श्रद्धालु पूरी सहूलियत के साथ पवित्र गुरुद्वारे में मत्था टेक सके.
(कमल नयन सिलोड़ी की रिपोर्ट)
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