Basant Panchami 2026: कहीं पीले कपड़े पहनती हैं महिलाएं तो कहीं होती है पतंगबाजी, जानिए देश के अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाई जाती है बसंत पंचमी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है. इसी वजह से इसे होली पर्व की शुरुआत भी माना जाता है. साथ ही, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बसंत पंचमी को बेहद शुभ दिन माना गया है.

Basant Panchami
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 21 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:13 AM IST
  • कहां कैसे मनाई जाती है बसंत पंचमी
  • कहीं पीले कपड़े पहनती हैं महिलाएं

हिन्दू धर्म में बसंत पंचमी का बहुत महत्व है. बसंत पंचमी का त्योहार हर वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. यह दिन ज्ञान, कला, संगीत और शिक्षा की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए विद्यार्थी, कलाकार और विद्वान इस दिन विशेष पूजा करते हैं.

बसंत पंचमी बसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जो सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत का संकेत देता है. प्रकृति में हरियाली, सरसों के पीले फूल इस पर्व को और खास बना देते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के 40 दिन बाद होली का त्योहार मनाया जाता है. इसी वजह से इसे होली पर्व की शुरुआत भी माना जाता है. साथ ही, किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए बसंत पंचमी को बेहद शुभ दिन माना गया है. 

पश्चिम बंगाल में श्रीपंचमी
पश्चिम बंगाल में बसंत पंचमी को 'श्रीपंचमी' के नाम से जाना जाता है. लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं और घरों को रंग-बिरंगे फूलों से सजाते हैं. मां सरस्वती की पूजा के बाद ‘पहल काव्य’ यानी संगीत और साहित्य की शुरुआत की परंपरा निभाई जाती है. कई जगहों पर इसे बसंती उत्सव के रूप में मनाया जाता है.

खेतों में हल चलाकर करते हैं नई शुरुआत
पंजाब और हरियाणा में बसंत पंचमी का पर्व खास उत्साह के साथ मनाया जाता है. पंजाब में वसंत पंचमी मेले का आयोजन किया जाता है, जहां लोग पीले वस्त्र पहनकर मंदिरों और गुरुद्वारों में माथा टेकते हैं. किसान इस दिन खेतों में हल चलाकर अच्छी फसल की कामना करते हैं. कई लोग पतंगबाजी भी करते हैं.

राजस्थान में पीले वस्त्र पहनती हैं महिलाएं
राजस्थान में बसंत पंचमी लोक परंपराओं के साथ मनाई जाती है. यहां राजस्थानी लोक संगीत और नृत्य के आयोजन होते हैं. महिलाएं पीले वस्त्र पहनकर घरों में हल्दी, कुमकुम और फूलों से पूजा करती हैं. ग्रामीण इलाकों में इसे खेतों और बागानों की उन्नति के पर्व के रूप में देखा जाता है.

महाराष्ट्र में बसंत पंचमी ‘वसंतोत्सव’ के रूप में मनाई जाती है. इस दिन गणपति पूजा के साथ-साथ संगीत और कला से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. लोग एक-दूसरे को पीले फूल और मिठाइयां देकर शुभकामनाएं देते हैं.

बिहार में होती है सरस्वती पूजा की धूम
बिहार-झारखंड में बसंत पंचमी को सरस्वती पूजा के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. घरों, स्कूलों और कॉलेजों में मां सरस्वती की मूर्तियों की स्थापना की जाती है. लोग पीले वस्त्र पहनते हैं और हल्दी, पीले फूल व मिठाइयों से पूजा करते हैं. इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है. खीर, मालपुआ और बूंदी जैसे पीले व्यंजन बनाए जाते हैं.

 

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