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सोने से पहले या सुबह करें हनुमान चालीसा का पाठ? जानें चौपाइयों के जाप से जुड़ी मान्यताएं

हनुमान चालीसा की कौन सी चौपाई किस समस्या के लिए पढ़ी जाती है? जानें बुद्धि, एकाग्रता, स्वास्थ्य, रिश्तों और मुश्किल समय के लिए खास चौपाइयां, साथ ही जाप करने की सही विधि और जरूरी सावधानियां.

Lord Hanuman
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 08 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:00 PM IST

हनुमान चालीसा भगवान हनुमान की भक्ति और प्रार्थना का एक सरल माध्यम है. इसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने लिखा था. इसमें 40 चौपाइयां हैं, इसलिए इसे चालीसा कहा जाता है. आसान भाषा में होने के कारण इसका पाठ बड़ी संख्या में लोग करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान चालीसा का पाठ मन को शांति देता है और भगवान हनुमान की कृपा पाने में मदद करता है.

क्या है हनुमान चालीसा का महत्व?

हनुमान चालीसा की अलग-अलग चौपाइयों को अलग-अलग भाव और प्रार्थना से जोड़ा जाता है. भक्त अपनी जरूरत के अनुसार किसी चौपाई का जाप कर सकते हैं. मान्यता है कि नियमित पाठ से डर और चिंता कम करने में मदद मिल सकती है और मन में आत्मविश्वास बढ़ता है.

हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें?

हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए सबसे पहले भगवान हनुमान और श्रीराम की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठें. सामने जल से भरा पात्र रख सकते हैं. अपनी श्रद्धा के अनुसार 3 से 108 बार तक हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है. पाठ पूरा होने के बाद जल को प्रसाद की तरह ग्रहण करने की धार्मिक परंपरा भी है.

कोशिश करें कि रोज एक ही समय पर पाठ किया जाए. विशेष स्थिति में यात्रा के दौरान या सोने से पहले भी हनुमान चालीसा पढ़ी जा सकती है. मन लगाकर और श्रद्धा के साथ पाठ करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

चौपाइयों का जाप कैसे करें?

अपनी जरूरत के अनुसार हनुमान चालीसा की किसी एक चौपाई का चयन कर सकते हैं. धार्मिक विधि के अनुसार सुबह तुलसी की माला से 3 से 11 माला तक जाप किया जाता है. जिस अवधि तक यह जाप करें, उस दौरान खान-पान और व्यवहार में संयम रखने की सलाह दी जाती है.

• बुद्धि और एकाग्रता के लिए

पढ़ाई, बुद्धि और एकाग्रता के लिए इस चौपाई का जाप किया जाता है:

"बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार.
बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥"

• स्वास्थ्य और परेशानी के समय

स्वास्थ्य संबंधी बाधाओं के लिए भक्त इस चौपाई का जाप करते हैं:

"नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥"

• रिश्तों की मजबूती के लिए

रिश्तों में प्रेम और मजबूती की कामना से यह चौपाई पढ़ी जाती है:

"रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥"

• बड़ी परेशानी में

जब कोई काम बहुत कठिन लग रहा हो, तब भक्त इस चौपाई का जाप करते हैं:

"दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥"

 

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