Iran: बंदर अब्बास का 130 साल पुराना हिंदू मंदिर, तेहरान के गुरुद्वारे के बारे में जानिए

ईरान के बंदर अब्बास में एक फेमस हिंदू मंदिर है. ये मंदिर 130 साल से अधिक पुराना है. इस मंदिर का निर्माण भारतीय कारोबारियों ने किया था. आपको बता दें कि ईरान में 20 हजार के आसपास हिंदू रहते हैं. तेहरान में एक गुरुद्वारा है, जिसका पीएम मोदी ने भी दौरा किया था.

Bandar Abbas Temple (Photo/Wikipedia)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध चल रहा है. दोनों तरफ से हमले किए जा रहे हैं. इस हमले में ईरान के कई बडे़ लीडर मारे गए हैं. जबकि ईरान के हमले में कई अमेरिकी और इजरायली की मौत हुई है. इस बीच ईरान और भारत के संबंधों की भी चर्चा हो रही है. ईरान में हिंदू समुदाय को लेकर भी चर्चा हो रही है. चलिए आपको ईरान के हिंदू और गुरुद्वारों के बारे में बताते हैं.

130 साल से अधिक पुराना हिंदू मंदिर-
ईरान में हिंदू आबादी काफी कम है. प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक साल 2010 में ईरान में करीब 20 हजार हिंदू रहते थे. ईरान के बंदर अब्बास में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर है. ये मंदिर 130 साल से अधिक पुराना है. इस मंदिर का निर्माण 1982 में किया गया था. यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है. इसे मोहम्मद हसन खान साद-अल-मलेक के शासनकाल में बनाया गया था. यह मंदिर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए काम करने वाले भारतीयों ने बनाया था.

भव्य है विष्णु मंदिर-
होर्मोजगान प्रांत में बंदर अब्बास का हिंदू मंदिर काफी भव्य है. इस मंदिर एक वर्गाकार कमरा है, इसके ऊपर एक गुंबद है. इसका निर्माण मूंगा पत्थर, मोर्टार, मिट्टी और लुई चाक से किया गया है. इस मंदिर में भगवान कृष्ण के कुछ चित्र हैं.

चाबहार का मंदिर-
ईरान के चाबहार में एक हिंदू में है. इसे स्थानीय स्तर पर बुतखाना या मंदिर के तौर पर जाना जाता है. इस मंदिर का निर्माण गुजरात के हिंदू कारोबारयों ने कराया था. इस मंदिर का निर्माण मूंगा पत्थर और लुई चाक से किया गया है. यह मंदिर 19वीं-20वीं शताब्दी के आसपास का है. 

तेहरान का गुरुद्वारा-
ईरान की राजधानी तेहरान में भाई गंगा सिंह सभा गुरुद्वारा है, इसे साल 1941 में बनाया गया था. इसे मस्जिद-ए-हिंदन के नाम से जाना जाता है. यहां हर शुक्रवार को गुरु का लंगर आयोजित किया जाता है. साल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गुरुद्वारे का दौरा किया था. ईरान में सिखों की संख्या काफी कम है.

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