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Ayatollah Ali Khamenei: अयातुल्ला अली खामेनेई कैसे बने मौलवी से ईरान के सुप्रीम लीडर... जानें आखिर क्यों बन गए थे अमेरिका के जानी दुश्मन? 

Death of Ayatollah Ali Khamenei: अमेरिका और इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. आइए जानते हैं खामेनेई के एक साधारण मौलवी से ईरान के सुप्रीम लीडर बनने और फिर अमेरिका के जानी दुश्मन बनने की कहानी. अली खामेनेई आखिरी दम तक यूएस को टक्कर देते रहे. 

Ayatollah Ali Khamenei  (File photo: ITG) Ayatollah Ali Khamenei (File photo: ITG)
हाइलाइट्स
  • अयातुल्ला अली खामेनेई पिछले 37 सालों से ईरान की सत्ता पर थे काबिज 

  • पूरी दुनिया में शिया राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक थे अली खामेनेई 

अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने  अली खामेनेई के मारे जाने की पुष्टि की और बाद में ईरान ने भी इस पर मुहर लगा दी.

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया गया है. इसके साथ ही 7 दिन की सार्वजनिक छुट्टी भी घोषित की गई है. 86 साल के अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया गया है. आइए जानते हैं खामेनेई के एक साधारण मौलवी से ईरान के सुप्रीम लीडर बनने और फिर अमेरिका के जानी दुश्मन बनने की कहानी. अली खामेनेई आखिरी दम तक यूएस को टक्कर देते रहे. अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान की सत्ता पर पिछले 37 सालों से काबिज थे. वह सिर्फ ईरान के ही सर्वोच्च नेता नहीं थे बल्कि पूरी दुनिया में शिया राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में से एक थे. 
 
कौन थे अली खामेनेई 
अयातुल्ला अली खामेनेई की जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के मशहद में हुआ था. उनके पिता एक साधारण मौलवी थे. अयातुल्ला अली खामेनेई ने बहुत ही कम उम्र में मजहबी शिक्षा लेनी शुरू कर दी थी. वह सिर्फ 11 साल की उम्र में मौलवी बन गए थे. अली खामेनेई आगे की पढ़ाई के लिए  1950 के दशक में कुम चले गए थे. उन्होंने कुम से एडवांस्ड इस्लामिक स्टडीज पूरी की थी. अली खामेनेई इस्लामी क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी से बहुत प्रभावित थे. वह खुमैनी के सबसे भरोसेमंद शागिर्दों में से एक बन गए थे.

वह ईरान के शाह मुहम्मद रजा पहलवी के खिलाफ प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर शामिल होते थे. इसके कारण खामेनेई 1960 के दशक में कई बार जेल भी जाना पड़ा. अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी और अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1979 में इस्लामिक क्रांति के दौरान शाह मुहम्मद रजा पहलवी की तानाशाही को उखाड़ फेंका.  इसके बाद अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी ईरान के पहले सुप्रीम लीडर बन गए थे. अयातुल्ला अली खामेनेई की भी पूरे ईरान में चर्चा हुई थी. अयातुल्ला अली खामेनेई 1979 में रिवोल्यूशनरी काउंसल के सदस्य बने. अयातुल्ला अली खामेनेई पर 1981 में बम से हमला हुआ था, जिसमें उनकी जान तो बच गई थी लेकिन उनका दाहिना हाथ हमेशा के लिए पैरालाइज हो गया था.
 
ईरान-इराक युद्ध के दौरान बने थे राष्ट्रपति 
ईरान और इराक युद्ध के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने थे. वह इस पद पर लगभग आठ सालों तक रहे. राष्ट्रपति बनने से पहले खामेनेई ने ईरान के उप-रक्षा मंत्री का पद भी संभाला था. इस दौरान उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) बनाई थी. 1989 में अयातुल्ला रुहुल्लाह खुमैनी की मौत के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई सुप्रीम लीडर बने थे. खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम सर्वोच्च शक्ति उन्हें प्राप्त थी. खामेनेई ने ही ईरान में पैरामिलिट्री सिस्टम बनाया था. यह सिस्टम ईरान की सीमाओं के बाहर और अंदर सुरक्षा करता था. 

कैसे बने खामेनेई अमेरिका के दुश्मन 
अयातुल्ला अली खामेनेई एक कट्टरपंथी नेता थे. खामेनेई हमेशा अमेरिका की नजरों में खटकते थे. खामेनेई ने पश्चिमी देशों और अमेरिका से कभी अच्छे संबंध नहीं रखे. इसकी मुख्य वजह इजराइल भी था. अयातुल्ला अली खामेनेई के सुप्रीम लीडर बनने के बाद ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ाया. इसके चलते वह अमेरिका और इजराइल के जानी दुश्मन बन गए थे. हालांकि ईरान का कहना था कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए है. खामेनेई भी हर बार कहते थे कि वह परमाणु शक्ति का इस्तेमाल हथियार बनाने में नहीं कर रहे हैं.