Jagannath Rath Yatra 2026: कब शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा? जान लें रथों की खासियत और महत्व!

इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी और 24 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाएगी. इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे.

पुरी जगन्नाथ मंदिर
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 09 जून 2026,
  • अपडेटेड 12:58 PM IST

ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ धाम में हर वर्ष आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा का श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते हैं. हिंदू धर्म के चार प्रमुख धामों में शामिल जगन्नाथ धाम की यह यात्रा आस्था, परंपरा और भक्ति का अद्भुत संगम मानी जाती है. तो चलिए आपको बताते हैं कि इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा कब शुरू होगी और इसका महत्व क्या है.

बता दें कि, इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी और 24 जुलाई तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाई जाएगी. इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचेंगे.

रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा भव्य रथों में सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक यात्रा करते हैं. इस यात्रा में भक्त स्वयं रथों की रस्सियां खींचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि रथ खींचने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिलती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस यात्रा में शामिल होने से भगवान के प्रति भक्ति और आध्यात्मिक जुड़ाव बढ़ता है. रथ यात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है. इस वर्ष 29 जून को भगवान जगन्नाथ का 108 कलशों के जल से अभिषेक किया जाएगा. इसके बाद भगवान को अस्वस्थ माना जाता है और लगभग 15 दिनों तक उनके दर्शन बंद रहते हैं. इसी अवधि के बाद रथ यात्रा का शुभारंभ किया जाता है.

भगवान जगन्नाथ के रथ की विशेषताएं
भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदी घोष है. यह तीनों रथों में सबसे बड़ा और भव्य माना जाता है. इसमें 16 विशाल पहिए होते हैं. रथ का निर्माण लगभग 332 लकड़ी के टुकड़ों से किया जाता है और इसकी ऊंचाई करीब 45 फीट होती है. इसे लाल और पीले रंग के कपड़ों से सजाया जाता है. रथ के ऊपर हनुमान जी और भगवान नृसिंह के प्रतीक चिन्ह स्थापित किए जाते हैं. यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे पीछे चलता है.

भगवान बलराम के रथ की खासियत
भगवान बलराम के रथ को तालध्वज कहा जाता है. इस रथ में 14 बड़े पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई लगभग 44 फीट होती है. इसे मुख्य रूप से नीले रंग से सजाया जाता है. रथ यात्रा के दौरान बलराम जी का रथ सबसे आगे चलता है.

देवी सुभद्रा के रथ की जानकारी
देवी सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है. इस रथ में 12 पहिए होते हैं और इसकी ऊंचाई लगभग 43 फीट होती है. रथ को काले रंग से सजाया जाता है. यात्रा के दौरान देवी सुभद्रा का रथ भगवान बलराम और भगवान जगन्नाथ के रथों के बीच में चलता है. जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का महापर्व है. हर वर्ष यह उत्सव भक्ति, संस्कृति और परंपरा की अनूठी मिसाल पेश करता है.
 

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