जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी महोत्सव की शुरुआत हो गई है. नौ दिन तक चलने वाले इस उत्सव में हर दिन भगवान गणेश का अलग स्वरूप और अलग झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी. सोमवार को महिलाओं की कलश यात्रा और जलाभिषेक के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ. 7 से 15 सितंबर तक मंदिर में भक्ति संगीत, ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक के कार्यक्रम भी होंगे. वहीं 14 सितंबर को गणेश जन्मोत्सव मनाया जाएगा और अगले दिन 15 सितंबर को गणेशजी नगर भ्रमण पर निकलेंगे.
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ नौ दिवसीय उत्सव
महोत्सव के पहले दिन सोमवार सुबह महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली. इसके बाद जलाभिषेक के साथ मंदिर में गणेशोत्सव की शुरुआत हुई. आने वाले दिनों में मंदिर में भगवान गणेश के लिए अलग-अलग झांकियां सजाई जाएंगी. कहीं फल-सब्जियों की झांकी होगी तो कहीं फूलों से गजानन का दरबार सजाया जाएगा. इसके साथ अलग-अलग दिनों में भक्ति संगीत, ध्रुपद, सुगम संगीत और कथक के कार्यक्रम भी होंगे.
8 सितंबर को 348 किलो पंचामृत से अभिषेक
8 सितंबर को पुष्य नक्षत्र के विशेष संयोग में भगवान गणेश का 348 किलो पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा. इस पंचामृत में 251 किलो दूध, 50 किलो दही, 25 किलो बूरा, 11 किलो शहद और 11 किलो घी शामिल होगा. इसी दिन मंदिर में केले और छप्पन भोग की झांकी भी सजाई जाएगी. शाम 6 बजे ध्रुपद गायन का आयोजन होगा.
9 सितंबर को हजारों किलो सामग्री से बनेंगे मोदक
गणेशोत्सव के तीसरे दिन यानी 9 सितंबर को मोदक झांकी सजाई जाएगी. इसके लिए करीब 3 हजार किलो घी, 3 हजार किलो बेसन, 9 हजार किलो शक्कर और 1000 किलो सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जाएगा. इस दिन 251-251 किलो के दो विशाल मोदक, 51-51 किलो के पांच मोदक, 21-21 किलो के 21 मोदक और 1.25 किलो के 1100 मोदक तैयार किए जाएंगे. सुबह 5 बजे से श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे. शाम 7 बजे निशुल्क प्रसाद का वितरण किया जाएगा. इस दिन बाहर से लाए गए प्रसाद को चढ़ाने की व्यवस्था नहीं रहेगी.
13 सितंबर को 3500 किलो मेहंदी से होगा सिंजारा
13 सितंबर को मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में सिंजारा उत्सव मनाया जाएगा. इस दौरान सोजत की करीब 3500 किलो मेहंदी से भगवान गणेश का सिंजारा किया जाएगा. रात 7:30 बजे पांच अलग-अलग स्थानों से मेहंदी बांटी जाएगी. महिलाओं और कन्याओं के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था रहेगी. इसी दिन गणेशजी को ननिहाल से आई नई पोशाक पहनाई जाएगी. भगवान को तीन महीने में तैयार किया गया मोती, सोना, पन्ना और माणक जड़ित नौलखा हार और स्वर्ण मुकुट भी धारण कराया जाएगा.
14 सितंबर को जन्मोत्सव, करीब 19 घंटे होंगे दर्शन
14 सितंबर को गणेश जन्मोत्सव का सबसे बड़ा आयोजन होगा. इस दिन मंगला आरती से लेकर रात 11:40 बजे होने वाली शयन आरती तक श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था रहेगी. जन्मोत्सव के दिन सुबह 11:20 बजे विशेष पूजन होगा. इसके बाद 11:30 बजे श्रृंगार आरती, दोपहर 2:15 बजे भोग आरती और शाम 7 बजे संध्या आरती होगी. दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे तक आधे घंटे के लिए पट मंगल रहेंगे. इस तरह जन्मोत्सव के दिन करीब 19 घंटे तक दर्शन किए जा सकेंगे.
महिलाओं के लिए पहली बार अलग दर्शन लाइन
जन्मोत्सव के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए इस बार दर्शन व्यवस्था में बदलाव किया गया है. पिछले साल की व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद पहली बार महिलाओं के लिए अलग दर्शन लाइन बनाई जा रही है. श्रद्धालुओं के लिए 6 एंट्री और 8 एग्जिट पॉइंट बनाए जाएंगे. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए होल्डिंग एरिया भी बढ़ाया जाएगा.
बुजुर्गों और निशक्तजनों के लिए ई-रिक्शा और बसें
मंदिर आने वाले बुजुर्गों और निशक्तजनों की सुविधा के लिए 100 ई-रिक्शा और 4 इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसें चलाई जाएंगी. पूरी व्यवस्था को संभालने के लिए करीब 500 स्वयंसेवक तैनात रहेंगे. श्रद्धालुओं से कैमरा और भारी सामान साथ नहीं लाने की अपील भी की गई है.
15 सितंबर को नगर भ्रमण पर निकलेंगे गणेशजी
नौ दिवसीय गणेशोत्सव का समापन 15 सितंबर को भगवान गणेश की शोभायात्रा के साथ होगा. इस दौरान गणेशजी नगर भ्रमण पर निकलेंगे. शोभायात्रा को देखते हुए एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा. प्रमुख मार्गों पर भीड़ के हिसाब से ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा.
इन रास्तों से मंदिर में मिलेगा प्रवेश
श्रद्धालुओं के मंदिर में प्रवेश के लिए एमडी रोड, जेएलएन मार्ग और तख्तेशाही रोड का इस्तेमाल किया जाएगा. वहीं जेडीए सर्किल, भैरव पथ और आरबीआई की ओर बैरिकेडिंग की जाएगी. मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की कोशिश इस बार भीड़ को व्यवस्थित रखने के साथ श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुगम तरीके से गणेशजी के दर्शन कराने की है.
ये भी पढ़ें