16 श्रृंगार
16 श्रृंगार
हर महिला की एक ख्वाहिश होती है कि वह सुंदर और आकर्षक नजर आए. अपने रूप को निखारने के लिए वह कई तरह के श्रृंगार करती है, लेकिन भारतीय संस्कृति में श्रृंगार का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है. महिला और श्रृंगार का रिश्ता शारीरिक सुंदरता तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसका संबंध भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो महिलाओं के श्रृंगार का उनकी किस्मत से भी सीधा संबंध माना जाता है. कहा जाता है कि श्रृंगार करने से ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है. इसी वजह से सनातन परंपरा में सोलह श्रृंगार को सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना गया है. मान्यता है कि इन सोलह श्रृंगारों से न सिर्फ रूप-सौंदर्य में निखार आता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा होती है. तो आइए जानते हैं सोलह श्रृंगार में शामिल उन खास चीजों के बारे में, जिन्हें लेकर मान्यताएं प्रचलित है.
सुहागिनों का खास आभूषण है सोलह श्रृंगार
भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को विवाहित स्त्री के सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सोलह तरह की ये श्रृंगार सामग्री अलग-अलग आभूषणों और वस्तुओं के रूप में होती है, जिन्हें सौभाग्यवती महिलाएं धारण करती हैं. मान्यता है कि सिर से लेकर पैर तक किए जाने वाले इन श्रृंगारों का संबंध महिला के रूप-सौंदर्य के साथ-साथ शरीर के संतुलन से भी है. इसी वजह से सोलह श्रृंगार को केवल सजने-संवरने की चीज नहीं माना गया है.
सिंदूर पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक
सोलह श्रृंगार में सिंदूर का अपना खास स्थान माना जाता है. इसे पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सिंदूर मस्तिष्क को शांत रखने में भी मदद करता है. सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर को उनके वैवाहिक जीवन और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है.
बिंदी आज्ञा चक्र से जुड़ी मान्यता
माथे के बीचों-बीच लगाई जाने वाली बिंदी भी सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा है. इसे दोनों भौहों के बीच लगाया जाता है. मान्यता है कि भौहों के बीच का यह स्थान आज्ञा चक्र से जुड़ा होता है और बिंदी इसे जागृत करने में सहायक मानी जाती है.
मांग टीका मन को एकाग्र करने वाला श्रृंगार
मांग के बीचों-बीच पहना जाने वाला मांग टीका भी महिलाओं के श्रृंगार को पूरा करता है. इसे सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने वाला आभूषण नहीं माना जाता. मान्यता के अनुसार, मांग टीका मन को नियंत्रित करने और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़ा है.
काजल से बढ़ता है आंखों का सौंदर्य
आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है. इससे आंखों का आकर्षण और बढ़ जाता है. मान्यता है कि काजल महिलाओं को बुरी नजर से भी बचाता है. यही वजह है कि इसे भी पारंपरिक श्रृंगार का खास हिस्सा माना गया है.
नथ चेहरे की खूबसूरती में लगाती है चार चांद
नाक में पहनी जाने वाली नथ महिला के चेहरे की सुंदरता को और बढ़ाती है. इसे खासतौर पर सुहागिनों के पारंपरिक श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता के अनुसार, नथ पहनने से पीड़ा में राहत मिलती है. इसके साथ ही यह चेहरे के रूप-सौंदर्य को भी निखारती है.
झुमके सुंदरता के साथ एक्यूप्रेशर से जुड़े
कानों में पहने जाने वाले झुमके चेहरे की सुंदरता बढ़ाने वाले आभूषणों में शामिल हैं. पारंपरिक रूप से यह महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा रहे हैं. मान्यता है कि झुमके एक्यूप्रेशर के माध्यम से भी लाभ पहुंचाते हैं. इसी वजह से इन्हें सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि श्रृंगार की खास सामग्री माना जाता है.
मंगलसूत्र पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक
मंगलसूत्र को पति-पत्नी के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है. विवाहित महिलाओं के लिए इसका धार्मिक और पारंपरिक महत्व खास है. मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है. इसे वैवाहिक जीवन और पति के साथ रिश्ते मजबूत होते हैं.
बाजूबंद रक्त संचार से जुड़ा है
भुजाओं में पहना जाने वाला बाजूबंद भी सोलह श्रृंगार में शामिल माना जाता है. यह महिलाओं की पारंपरिक पोशाक और श्रृंगार को और आकर्षक बनाता है. मान्यता के अनुसार, बाजूबंद रक्त संचार को नियमित रखने में सहायक होता है.
मेहंदी सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक
हाथों और पैरों में रचाई जाने वाली मेहंदी महिलाओं के श्रृंगार को खास बना देती है. इसे सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मेहंदी की ठंडक को तनाव दूर करने में सहायक माना जाता है. यही कारण है कि त्योहारों और खास मौकों पर महिलाओं के श्रृंगार में मेहंदी की खास जगह होती है.
चूड़ियां खुशहाली और ऊर्जा का प्रतीक
हाथों में खनकती चूड़ियां महिलाओं के श्रृंगार की पहचान मानी जाती हैं. इन्हें खुशहाली, सौभाग्य और ऊर्जा के संचार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि चूड़ियां रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी सहायक होती हैं.
अंगूठी प्रेम और विश्वास का बंधन
उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी प्रेम और विश्वास के बंधन को दर्शाती है. सोलह श्रृंगार में इसका भी खास महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, तर्जनी या अनामिका उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी रक्त संचार को सुधारने में सहायक होती है.
कमरबंद शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है
कमर में पहना जाने वाला कमरबंद भी महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा है. यह आभूषण सुंदरता बढ़ाने के साथ शरीर के पोस्चर से भी जुड़ा माना जाता है. मान्यता है कि कमरबंद शरीर का पोस्चर सही रखने और शरीर में ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है.
पायल की मधुर आवाज भी है खास
पैरों में पहनी जाने वाली चांदी की पायल चलने पर मधुर ध्वनि पैदा करती है. यही ध्वनि इसे महिलाओं के श्रृंगार में अलग पहचान देती है. मान्यता है कि चांदी शरीर की गर्मी को सोखती है और रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक होती है.
बिछिया हार्मोनल संतुलन से जुड़ी मान्यता
पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा मानी जाती है. खासतौर पर विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार में इसका महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, बिछिया महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और मासिक चक्र को नियमित रखने में सहायक होती है.
गजरा देता है खुशबू और ताजगी
बालों में लगाया जाने वाला गजरा प्राकृतिक सुगंध और ताजगी प्रदान करता है. फूलों से बनी इसकी खुशबू पूरे श्रृंगार को और आकर्षक बना देती है. मान्यता है कि गजरे की प्राकृतिक सुगंध स्नायु तंत्र को शांत करती है. इससे मन प्रसन्न और ऊर्जावान बना रहता है.
शुभ रंगों के वस्त्र भी हैं श्रृंगार का हिस्सा
सोलह श्रृंगार को पूरा करने के लिए विशेष परिधान भी पहने जाते हैं. महिलाएं लाल, गुलाबी या पीले रंग के शुभ वस्त्र पहन सकती हैं. इन रंगों के वस्त्रों को भी पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है और महिला के पूरे श्रृंगार में इनका खास स्थान बताया गया है.
सोलह श्रृंगार से जुड़ी हैं कई मान्यताएं
इस तरह सोलह श्रृंगार में शामिल हर सामग्री के साथ अपनी-अपनी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. कहीं इसे पति के प्रेम और वैवाहिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है तो कहीं स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, महिलाओं का श्रृंगार उनकी किस्मत को संवारने में भी भूमिका निभा सकता है. मान्यता है कि इससे ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है.
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