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1500 साल पुराना चमत्कारी गणेश मंदिर, गणेश चतुर्थी पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब... जानें मंदिर की अनोखी मान्यता

जैसलमेर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित 1500 साल पुराने चूंधी गणेश मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. मंदिर बरसाती नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्र के बीच बना है. इसके बावजूद मान्यता है कि तेज पानी भी गणेश जी की प्रतिमा को आज तक अपनी जगह से नहीं हिला सका. यही वजह है कि इस मंदिर को चमत्कारी माना जाता है.

जैसलमेर के 1500 साल पुराने चून्धी गणेश मंदिर अपने आप में ही चमत्कारिक मंदिर बताया जाता है
विमल भाटिया
  • जैसलमेर ,
  • 15 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:50 PM IST

जैसलमेर में गणेश चतुर्थी के मौके पर एक अनोखा नजारा देखने को मिला. शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित 1500 साल पुराने चूंधी गणेश मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. मंदिर बरसाती नदी के तेज बहाव वाले क्षेत्र के बीच बना है. इसके बावजूद मान्यता है कि तेज पानी भी गणेश जी की प्रतिमा को आज तक अपनी जगह से नहीं हिला सका. यही वजह है कि इस मंदिर को चमत्कारी माना जाता है.

सुबह 5 बजे से मंदिर की ओर बढ़ने लगा श्रद्धालुओं का रेला
गणेश चतुर्थी के दिन सोमवार सुबह करीब 5 बजे से ही जैसलमेर शहर और आसपास के इलाकों से श्रद्धालु पैदल मंदिर की ओर निकल पड़े. करीब 12 किलोमीटर के रास्ते पर जगह-जगह भक्तों की भीड़ नजर आई. बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से भी मंदिर पहुंचे. दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं. मंदिर परिसर को आकर्षक लाइटिंग और फूलों से सजाया गया था. गणेश जी का विशेष श्रृंगार किया गया, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा. मेले में बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले और अलग-अलग खेलों की भी व्यवस्था की गई.

51 हजार लड्डुओं का लगाया गया भोग
चूंधी गणेश मेला कमेटी के विमल गोपा के मुताबिक, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हनुमान चौराहे से मंदिर तक निशुल्क बसों की व्यवस्था की गई. मेले में अलग-अलग देवी-देवताओं की झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं. गणेश जी को 51 हजार लड्डुओं का भोग लगाया गया. शाम 7 बजे महाआरती के बाद भजन संध्या का आयोजन किया गया. इसके अलावा सुंदरकांड का पाठ भी हुआ.

नदी में पत्थरों से घर बनाते हैं भक्त
इस मंदिर को 'घर देने वाले गणेश जी' के नाम से भी जाना जाता है. श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां गणेश जी से अपना घर मांगने पर मनोकामना पूरी होती है. इसी आस्था के चलते मंदिर के पास नदी में लोग पत्थरों से छोटे-छोटे घर बनाते हैं. गणेश चतुर्थी पर भी नदी में ऐसे घरों के मॉडल बनाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही.

बारिश में होता है गणेश जी का जलाभिषेक
मान्यता है कि बारिश के मौसम में बरसाती नदी का पानी मंदिर परिसर से होकर गुजरता है और गणेश जी की प्रतिमा को छूकर निकलता है. भक्त इसे गणेश जी का प्राकृतिक जलाभिषेक मानते हैं. तेज बहाव के बावजूद प्रतिमा के अपनी जगह से नहीं हिलने को लेकर भी यहां लोगों की गहरी आस्था है.

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