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विंध्याचल की तलहटी में स्थित है कामाख्या उप शक्तिपीठ, जहां आज भी जीवित हैं द्वापर युग की मान्यताएं

इस देवी मठ को चमत्कारों के लिए भी जाना जाता है. किंवदंतियों के अनुसार, यहां साधना करने वाले पुजारी देवी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव कर लेते थे. हालांकि, समय के साथ यह परंपराएं बदल गईं, लेकिन आज भी यह स्थान आस्था, रहस्य और शक्ति का अद्भुत संगम बना हुआ है.

प्राचीन कामाख्या उप-शक्तिपीठ
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

रायसेन जिले में स्थित यह अनोखा स्थान विंध्याचल पर्वत की तलहटी में बसा है, जहां त्रेतायुग और द्वापर युग से जुड़ी मान्यताएं आज भी जीवित हैं. कहा जाता है कि द्वापर युग में स्यमंतक मणि की खोज के दौरान भगवान श्रीकृष्ण यहां आए थे. इस वजह से स्थानीय लोग उन्हें अपना जामाता मानते हैं. यही स्थान कामाख्या देवी के उप-तांत्रिक शक्तिपीठ के रूप में भी प्रसिद्ध है, जहां साधना का विशेष महत्व माना जाता है.

भगदेई गांव और प्राचीन मंदिर का महत्व
रायसेन जिला मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर दूर बरेली तहसील में स्थित भगदेई गांव में यह प्राचीन कामाख्या उप-शक्तिपीठ मंदिर मौजूद है. मान्यता है कि यहां के पुजारी रोज पूजा-पाठ के बाद अपना सिर काटकर मां को अर्पित करते थे और देवी की कृपा से पुनः जीवित हो जाते थे. स्थानीय जानकार पंडित कमल यागबल्कि के अनुसार, एक समय देवी ने स्वयं पुजारी को यह प्रथा बंद करने का आदेश दिया था, क्योंकि कलयुग का आरंभ हो चुका था.

अधूरी रह गई एक अनोखी परंपरा
कहते हैं कि देवी के मना करने के बावजूद एक दिन पुजारी ने अपनी पुरानी परंपरा निभाते हुए फिर से अपना सिर अर्पित कर दिया, लेकिन इस बार वह दोबारा जीवित नहीं हो पाया. इस घटना के बाद यह परंपरा हमेशा के लिए समाप्त हो गई. आज भी यह कथा लोगों के बीच श्रद्धा और रहस्य का विषय बनी हुई है.

तांत्रिक साधना और विशेष मान्यताएं
यह स्थान आज भी तांत्रिक साधना और शोध के लिए जाना जाता है. यहां कामाख्या देवी की प्रसव अवस्था की प्राचीन मूर्ति स्थापित है, जो इस मंदिर को और भी विशेष बनाती है. नवरात्रि के दौरान यहां तांत्रिक क्रियाएं और साधनाएं की जाती हैं, और साधक अपनी सिद्धियां प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं.

जामगढ़-भगदेई: शिव-शक्ति का पवित्र संगम
जामगढ़-भगदेई क्षेत्र को शिव और शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है. कई धार्मिक ग्रंथों में सती प्रसंग से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख इस स्थान से जुड़ा हुआ बताया गया है. यहां सदियों पुराना शिव मंदिर और जामवंत गुफा भी स्थित है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को और बढ़ाते हैं.

नामकरण और ऐतिहासिक मान्यताएं
इतिहासकारों के अनुसार, भगदेई नाम का संबंध भगदेवी से है, जो समय के साथ अपभ्रंश होकर वर्तमान नाम में बदल गया. इसी तरह जाम्बगढ़ का नाम भी बदलकर जामगढ़ हो गया. यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही शिव और शक्ति की उपासना का केंद्र रहा है.

(रिपोर्ट- राजेश कुमार)

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