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66 साल से चली आ रही अनोखी परंपरा, जामनगर की गरबी में भगवान बनकर गरबा करते हैं युवा

गुजरात के जामनगर में नवरात्रि के दौरान एक ऐसी अनोखी गरबी का आयोजन होता है, जहां भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमानजी, गणपति बप्पा और श्रीकृष्ण सहित अनेक धार्मिक पात्र एक साथ पारंपरिक रास-गरबा करते नजर आते हैं.

Bharat Mata Adarsh Garbi
दर्शन ठक्कर
  • जामनगर,
  • 15 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:12 PM IST

गुजरात के जामनगर में नवरात्रि के दौरान एक ऐसी अनोखी गरबी का आयोजन होता है, जहां भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ भगवान श्री राम, लक्ष्मण, हनुमान जी, गणपति बप्पा और श्रीकृष्ण सहित अनेक धार्मिक पात्र एक साथ पारंपरिक रास-गरबा करते नजर आते हैं.  शहर के पटेल चौक स्थित श्री भारतमाता आदर्श गरबी मंडल की यह विशेष गरबी अपनी अनूठी वेशभूषा, 66 वर्ष पुरानी परंपरा और सांप्रदायिक एकता के संदेश के लिए जानी जाती है.

1960 से चली आ रही है परंपरा
श्री भारतमाता आदर्श गरबी मंडल में वर्ष 1960 से धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक पात्रों की वेशभूषा में रास-गरबा करने की परंपरा जारी है. यहां युवा विभिन्न देवी-देवताओं और पौराणिक पात्रों का रूप धारण कर गरबा खेलते हैं. भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमानजी, गणपति बप्पा, श्रीकृष्ण, राधाजी और भगवान शंकर की वेशभूषा दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहती है. इसके अलावा यमराज जैसे पात्र भी अपनी अनूठी प्रस्तुति से लोगों का ध्यान खींचते हैं.

धार्मिक आस्था के साथ ऐतिहासिक विरासत की झलक
इस गरबी की खासियत केवल धार्मिक पात्रों तक सीमित नहीं है. यहां छत्रपति शिवाजी महाराज, सिकंदर और ऋषि-मुनियों सहित विभिन्न ऐतिहासिक एवं पौराणिक पात्रों की वेशभूषा भी देखने को मिलती है. युवा इन पात्रों के माध्यम से भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को जीवित करते हैं. पात्रों के अनुरूप वेशभूषा तैयार करने से लेकर पारंपरिक प्रस्तुतियों तक, युवाओं की मेहनत और समर्पण स्पष्ट दिखाई देता है. यहां पारंपरिक गरबा, दोहा और छंद की गायकी के साथ उत्सव की रंगत जमती है. आधुनिक संगीत के दौर में भी यह मंडल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है.

सांप्रदायिक एकता की मिसाल
श्री भारतमाता आदर्श गरबी मंडल की एक बड़ी विशेषता सामाजिक सद्भाव भी है. इस क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम, सिख और ईसाई परिवार भी गरबी के आयोजन में सहयोग करते हैं. वहीं, अष्टमी के दिन आर्य समाज की ओर से वैदिक यज्ञ का आयोजन किया जाता है. विभिन्न समुदायों की सहभागिता इस आयोजन को भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक बनाती है.

निःशुल्क आयोजन, स्वैच्छिक सहयोग से व्यवस्था
इस गरबी में भाग लेने वाले खिलाड़ियों और दर्शकों से किसी प्रकार की फीस या टिकट नहीं लिया जाता. स्थानीय निवासियों और शुभचिंतकों के स्वैच्छिक सहयोग से पूरे आयोजन की व्यवस्था की जाती है. अतीत में अनुशासित व्यवस्था और स्वच्छता के लिए भी मंडल को विभिन्न पुरस्कार मिल चुके हैं. कुल मिलाकर, श्री भारतमाता आदर्श गरबी मंडल की 66 वर्ष पुरानी परंपरा धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और सांप्रदायिक सद्भाव का अनूठा संगम है. यहां होने वाला रास-गरबा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने और समाज में एकता का संदेश फैलाने का माध्यम भी है. यही विशेषता इसे जामनगर की नवरात्रि का एक प्रमुख आकर्षण बनाती है.

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