भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को होने के कारण इसको कृष्णजन्माष्टमी कहते हैं. भगवान कृष्ण का जन्म वृष लग्न, वृष राशि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति, आयु तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जा रही है. यह भगवान कृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव है. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है. जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर हो वे जन्माष्टमी पर विशेष पूजा से लाभ पा सकते हैं. इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और भगवान के बाल स्वरूप, लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करते हैं.
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण की पूजा कब होगी
भगवान कृष्ण का जन्म वृष लग्न और वृष राशी में हुआ था. अतः जन्म का उत्सव इसी काल में मनाया जाता है. इस बार अष्टमी 04 सितम्बर को मध्य रात्रि 12.13 तक रहेगी. इसी मध्य रात्रि के समय में, वृष लग्न में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा. वृष लग्न लगभग 12.05 पर समाप्त हो जाएगा, इसलिए इस समय के पूर्व ही जन्मोत्सव की शुरुआत कर लेनी चाहिए.
किस प्रकार मनाएं जन्माष्टमी का पर्व
प्रातःकाल स्नान करके आज के व्रत या पूजा का संकल्प लें. दिन भर जलाहार या फलाहार ग्रहण करें. सात्विक रहें. मध्यरात्रि को भगवान कृष्ण की धातु की प्रतिमा को किसी पात्र में रखें. उस प्रतिमा को पहले दूध से, फिर दही से, फिर शहद से, फिर शर्करा से और अंत में घी से स्नान कराएं. इसी को पंचामृत स्नान कहते हैं. इसके बाद जल से स्नान कराएं. ध्यान रखें की अर्पित की जाने वाली चीज़ें शंख में डालकर ही अर्पित की जाएंगी. तत्पश्चात पीताम्बर, पुष्प और प्रसाद अर्पित करें. इसके बाद भगवान को झूले में बैठाकर झूला झुलाएं. झूला झुलाकर प्रेम से अपनी कामना कहें.
किन मंत्रों और स्तुतियों से भगवान कृष्ण की उपासना करें
भगवान कृष्ण का नाम ही एक महामन्त्र है. इसका भी जप किया जा सकता है. इसके अलावा हरे कृष्ण महामन्त्र का भी जप कर सकते हैं. जीवन में प्रेम और आनंद के लिए "मधुराष्टक" का पाठ करें. श्री कृष्ण को गुरु रूप में प्राप्त करने के लिए श्रीमद्भगवदगीता का पाठ करें. अपनी समस्त कामनाओं को पूर्ण करने के लिए गोपाल सहस्त्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं.