Jaya Ekadashi: जया एकादशी के व्रत का क्या है नियम, जानें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?

जया एकादशी की शुरुआत आज यानी 28 जनवरी को शाम 4:35 बजे से हो चुकी है और इसका समापन 29 जनवरी को दोपहर 1:55 बजे हुआ. उदया तिथि के अनुसार व्रत 29 जनवरी को रखा गया. व्रत का पारण 30 जनवरी की सुबह 6:41 से 8:56 के बीच किया जा सकता है.

Jaya Ekadashi
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 5:11 PM IST

माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी, कहते हैं. ये एकादशी भगवान कृष्ण को समर्पित है. इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और बैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है. ज्योतिष के मुताबिक इस दिन कृष्ण की उपासना से जीवन के कष्ट दूर होते हैं. भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी.

व्रत के नियम-
इस दिन उपवास रखने वाले को सुबह स्नान करके भगवान नारायण को जल, चंदन, रोली, धूप, दीप, फल-फूल और पंचामृत अर्पित करना चाहिए. व्रत की कथा सुनने और आरती करने के बाद अगले दिन इसका पारण करना चाहिए. व्रत दो प्रकार से रखा जा सकता है. पहला निर्जल व्रत और दूसरा फलाहारी व्रत. स्वस्थ व्यक्ति को निर्जल व्रत रखना चाहिए, जबकि अन्य लोग फलाहारी व्रत रख सकते हैं.

जया एकादशी की कथा-
पौराणिक कथा के अनुसार इंद्र के श्राप से एक गंधर्व और उसकी पत्नी पिशाच योनि में भटकने लगे. ऋषि की सलाह पर उन्होंने जया एकादशी का व्रत किया, जिससे उन्हें मुक्ति मिली और उनका उद्धार हुआ.

ग्रहों की शांति के उपाय-
जया एकादशी पर ग्रहों की शांति के लिए भगवान विष्णु की उपासना करें. पीले कपड़े पर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें और धूप-दीप जलाएं. राहु, केतु और शनि जैसे ग्रहों की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए तिल मिश्रित मिठाई का दान करें.

दान का महत्व-
माघ मास में दान का विशेष महत्व है. तिल, गुड़ और कंबल का दान करने से अक्षय पुण्य प्राप्त होता है. दान करते समय कुपात्र को दान न दें और उत्तम वस्तुएं ही दान करें. दान का प्रभाव जीवन में शुभता और समृद्धि लाता है.

क्या करें और क्या न करें?
जया एकादशी पर तामसिक आहार, व्यवहार और विचार से बचें. रोगी व्यक्ति उपवास न रखे, लेकिन भगवान नारायण का ध्यान और मंत्र जाप करें. पीपल और केले के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं. इस दिन झूठ न बोलें और सात्विक विचार रखें.

कब है जया एकादशी?
जया एकादशी की शुरुआत आज यानी 28 जनवरी को शाम 4:35 बजे से हो चुका है और इसका समापन 29 जनवरी को दोपहर 1:55 बजे हुआ. उदया तिथि के अनुसार व्रत 29 जनवरी को रखा गया. व्रत का पारण 30 जनवरी की सुबह 6:41 से 8:56 के बीच किया जा सकता है. जया एकादशी व्रत से व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, पापों से मुक्ति और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है.

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