उत्तर प्रदेश के झांसी में स्थित करौंदी माता मंदिर आस्था और विश्वास का एक ऐसा केंद्र है, जहां से कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता. करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में देवी मां पिंडी के रूप में विराजमान हैं और इसे सिद्धपीठ के रूप में भी जाना जाता है. मान्यता है कि सच्चे मन से यहां दर्शन करने वाले हर भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होती है.
झांसी महानगर से लगभग 10 किलोमीटर दूर शिवपुरी हाईवे पर ग्राम सिजवाह के पास स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर आज मंदिर बना है, वहां कभी करौंदी का घना जंगल हुआ करता था. इसी जंगल में देवी मां स्वयं पिंडी के रूप में प्रकट हुई थीं, जिसके कारण उन्हें करौंदी माता कहा जाने लगा.
मंदिर से जुड़ी एक और रोचक कथा प्रचलित है. कहा जाता है कि पास में भगवान शंकर का एक मठ था और एक शेर अक्सर इस स्थान पर आकर रुकता था. एक दिन कुछ लोगों ने करौंदी के पेड़ के नीचे देवी मां को पिंडी रूप में देखा, जिसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई. समय के साथ यह स्थान एक भव्य मंदिर के रूप में स्थापित हो गया.
आज इस मंदिर में झांसी ही नहीं, बल्कि पूरे बुंदेलखंड और देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. भक्तों का कहना है कि यहां आने से उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि उनकी इच्छाएं भी पूरी होती हैं. खासकर नवरात्रि के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है.
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