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Maa Gauri: कौन हैं मां गौरी और क्या है इनका महत्व? यहां जानिए  

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन मां गौरी की पूजा की जाती है. मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत रंग में इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है. विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण मैं इनकी पूजा अचूक होती है.  

Maa Gauri Maa Gauri

 चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन मां गौरी की पूजा का विधान है. भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी, जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. जब भगवान शिव ने इनको दर्शन दिया तब उनकी कृपा से इनका शरीर अत्यंत गौर हो गया और इनका नाम गौरी हो गया.

माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए इन्हीं की पूजा की थी. मां गौरी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत रंग मैं इनका ध्यान करना अत्यंत लाभकारी होता है. विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है. यदि किसी लड़की का विवाह न हो पा रहा हो तो अष्टमी तिथि को मां दुर्गा को पीली साडी और शृंगार की सामग्री अर्पित करें. इससे आपका विवाह शीघ्र सम्पन्न हो सकेगा. ज्योतिष में मां गौरी का संबंध शुक्र नामक ग्रह से माना जाता है. 

क्या है मां गौरी की पूजा विधि? 
1. पीले वस्त्र धारण करके पूजा आरम्भ करें. 
2. मां के समक्ष दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. 
3. पूजा में मां को श्वेत या पीले फूल अर्पित करें. 
4. उसके बाद इनके मंत्रों का जाप करें.
5. यदि पूजा मध्य रात्रि में की जाय तो इसके परिणाम ज्यादा शुभ होंगे. 

क्या हैं माता गौरी की पूजा की विशेष बातें?
मां की उपासना सफेद वस्त्र धारण करके करें. माँ को सफेद फूल और सफेद मिठाई अर्पित करें. साथ में मां को इत्र भी अर्पित करें. माता की पूजा से मनचाहा विवाह हो जाता है. साथ ही शुक्र से संबंधित समस्याएं भी हल होती हैं.

अष्टमी तिथि के दिन कन्याओं को भोजन कराने की है परंपरा
नवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं है. यह नारी शक्ति के और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है इसलिए नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है. हालांकि नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है लेकिन अष्टमी और नवमी को अवश्य ही पूजा की जाती है. 2 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या की पूजा का विधान किया गया है. अलग-अलग उम्र की कन्या देवी के अलग-अलग रूप को बताती हैं.