बुंदेलखंड की धरती पर देवी-देवताओं के प्रति लोगों की आस्था सदियों पुरानी है. नवरात्र के दिनों में यह आस्था मंदिरों में खास तौर पर देखने को मिलती है. कहीं भक्त माता की पूजा में लीन हैं, तो कहीं अनोखी परंपराएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं. ऐसा ही एक मामला झांसी जिले के मऊरानीपुर क्षेत्र के बुखारा गांव से सामने आया है. यहां स्थित गौरैया माता मंदिर में जानकी देवी के शरीर पर जवारे उगने की मान्यता चर्चा का विषय बनी हुई है. इस धार्मिक आयोजन को देखने और माता के दर्शन करने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं.
सपने में माता के दर्शन होने के बाद लिया संकल्प
बुखारा गांव के गौरैया माता मंदिर को स्थानीय लोग गोड़ैया माता मंदिर के नाम से भी जानते हैं. जानकी देवी और उनके परिवार से जुड़े लोगों का कहना है कि माता रानी के सपने में दर्शन होने और प्रेरणा मिलने के बाद यह धार्मिक संकल्प लिया गया. ग्रामीणों की मान्यता है कि इसी के बाद जानकी देवी के शरीर पर जवारे उगने की बात सामने आई. परिवार के मुताबिक, करीब 15 दिनों से मंदिर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे हैं. शुरुआत में आर्थिक तंगी के कारण पूजा और सेवा की व्यवस्था करना मुश्किल लग रहा था. लेकिन धीरे-धीरे गांव के लोग आगे आए और सभी ने मिलकर आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली. अब यह केवल एक परिवार का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक आस्था का हिस्सा बन गया है.
मंदिर में सुबह से गूंजते हैं जयकारे
मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना, आरती और मंत्र-जाप का सिलसिला शुरू हो जाता है. माता रानी के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है. महिलाएं और पुरुष अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं. कोई पूजा की व्यवस्था संभाल रहा है, तो कोई मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की मदद कर रहा है. ग्रामीणों के मुताबिक, दूर-दराज से आने वाले भक्त भी माता के दर्शन कर रहे हैं. श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना करते हैं. मंदिर में लोगों के बैठने और धूप से बचने के लिए छाया की व्यवस्था भी की गई है.
क्या होते हैं जवारे, जिन्हें माना जाता है शुभ?
नवरात्र के दौरान जवारे उगाने की परंपरा कई जगह देखने को मिलती है. जवारे दरअसल जौ के अंकुर होते हैं, जिन्हें मिट्टी के पात्र में बोया जाता है. देवी आराधना में इन्हें शुभता और आस्था का प्रतीक माना जाता है. आमतौर पर नवरात्र के पहले दिन इन्हें बोया जाता है और पूजा के दौरान इनकी देखभाल की जाती है. हालांकि, बुखारा गांव में जानकी देवी के शरीर पर जवारे उगने की बात स्थानीय लोगों की धार्मिक मान्यता के तौर पर सामने आई है. इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद इस अनोखी साधना को लेकर लोगों में उत्सुकता है और श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं.
पुजारी ने बताई मंदिर से जुड़ी मान्यता
मंदिर के पुजारी मुकेश कुमार पौसवार के अनुसार, यहां चल रहा धार्मिक आयोजन माता रानी के प्रति श्रद्धा और सामूहिक सेवा का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार, गांव की बहू जानकी देवी के शरीर पर जवारे होने के बाद विशेष पूजा-पाठ शुरू किया गया. मंदिर में मंत्र-जाप, भजन संध्या और दूसरे धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं.
पुजारी के मुताबिक, स्थानीय मान्यता में गोड़ैया माता को देवी भद्रकाली की छोटी बहन माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि इस स्थान पर भद्रकाली की स्थापना के समय ही गोड़ैया माता की स्थापना भी हुई थी. मंदिर के आसपास हनुमान जी और भगवान शंकर के मंदिरों के साथ प्राचीन मूर्तियां भी मौजूद हैं.
जानकी देवी ने की सभी के सुखी रहने की कामना
जानकी देवी ने इस आयोजन को माता रानी के प्रति अपनी श्रद्धा से जुड़ा बताया. उनका कहना है कि वह गांव और आसपास के क्षेत्र के सभी लोगों के सुखी रहने की कामना करती हैं. उनके मुताबिक, माता के दरबार में आने वाला हर व्यक्ति प्रसन्न रहे और किसी को निराश होकर वापस न लौटना पड़े. परिवार की महिलाओं और ग्रामीणों ने भी बताया कि आर्थिक परेशानियों के बावजूद गांव के लोग अपनी क्षमता के अनुसार पूजा और सेवा में सहयोग कर रहे हैं. उनकी मान्यता है कि माता रानी की कृपा से गांव में सुख-समृद्धि बनी रहेगी.
नवमी या दसवें दिन भंडारे की तैयारी
ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 15 दिनों से चल रहे इस धार्मिक आयोजन के समापन पर नवमी या दसवें दिन भंडारा कराने की तैयारी की जा रही है. इसमें आसपास के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को भी आमंत्रित करने की योजना है. गांव के लोग आपसी सहयोग से इसकी व्यवस्था जुटा रहे हैं. हालांकि, आयोजन से जुड़े एक पुजारी ने जानकी देवी के करीब 15 दिनों से भोजन नहीं करने और केवल चाय पीने का दावा भी किया है. इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है. लंबे समय तक भोजन न करना स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है. ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति की सेहत और चिकित्सकीय देखभाल को प्राथमिकता देना जरूरी है. फिलहाल, बुखारा गांव का गौरैया माता मंदिर ग्रामीणों की आस्था और सामूहिक सहयोग का केंद्र बना हुआ है. जानकी देवी की साधना से जुड़ी मान्यताओं के बीच गांव के लोग एक साथ मिलकर पूजा-पाठ कर रहे हैं. उनकी प्रार्थना है कि माता रानी की कृपा बनी रहे और गांव के हर परिवार में सुख-शांति और खुशहाली आए.
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