Advertisement

Savan Kanwar Yatra Story: भगवान शिव ने पूरी की दो बेटों की मुराद... अब 5 साल के बेटे के साथ कांवड़ लेकर निकले पिता, महादेव की नगरी काशी में करेंगे जलाभिषेक

मध्य प्रदेश के सोनू ने भगवान शिव से मन्नत मांगी थी कि उनके दो बेटे हों. महादेव ने उनकी यह मुराद पूरी कर दी. अब सोनू का बड़ा बेटा 5 साल का है और छोटा 3 साल का. सोनू अपने 5 साल के बेटे का हाथ पकड़कर प्रयागराज पहुंचे हैं. कंधे पर 50 किलो गंगाजल से भरी कांवड़ है. सोनू महादेव की नगरी काशी के शिवालय में जलाभिषेक करेंगे. 

Kanwar Yatra Story
आनंद राज
  • प्रयागराज,
  • 08 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 10:23 AM IST

मध्य प्रदेश के रहने वाले सोनू ने भगवान शिव से कामना किया था कि उनके दो बेटे हों. फिर वक्त बीता. मन्नत पूरी हुई. दो बेटे हुए. बड़ा बेटा अब 5 साल का है और छोटा 3 साल का हो गया है. मन्नत पूरी होने के बाद सोनू की आस्था और बढ़ गई. सावन आया तो उन्होंने कांवड़ उठाई और तय किया कि कांवड़ अकेले नहीं उठाएंगे. 5 साल के बेटे को भी साथ ले जाएंगे ताकि बेटा ये समझे कि ये कांवड़ है क्या, गंगाजल का मतलब क्या है और उस परंपरा की कहानी क्या है, जिसे उसके पिता आगे बढ़ा रहे हैं.

साथ-साथ चल रहा 5 साल का बेटा
सोनू प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट पहुंचे. यहां से उन्हें गंगाजल लेकर महादेव की नगरी काशी जाना है. कांवड़ में गंगाजल है, करीब 50 किलो वजन होगा. सोनू की कांवड़ में छह स्टील की गागर हैं. इन गागरों में गंगाजल है. उनके साथ चल रहे एक साथी की कांवड़ में करीब 30 किलो गंगाजल है. यानी दोनों की कांवड़ मिलाकर करीब 80 किलो वजन है. सोनू के साथ 5 साल का बेटा चल रहा है. छोटा सा बच्चा और सामने लंबा रास्ता. लेकिन पिता का हाथ पकड़े हुए बच्चा काशी की ओर चल पड़ा है. सोनू कहते हैं कि वह चाहते हैं कि उनका बेटा इन परंपराओं को बचपन से देखे, समझे और सीखे. सोनू चाहते हैं कि आज वह बेटे का हाथ पकड़कर चले हैं, इसके बाद वह खुद इस परंपरा को आगे बढ़ाए.

5 साल पहले मांग थी मुराद
पांच साल पहले एक पिता ने भगवान शिव से दो बेटों की मुराद मांगी. आज वही पिता अपने 5 साल के बेटे के साथ कांवड़ लेकर चल रहा है. कभी मन्नत पूरी होने का इंतजार था. आज उसी मन्नत की खुशी में कंधे पर गंगाजल है. बच्चे को शायद ये भी नहीं पता कि उसके पिता ने उसे पाने के लिए कभी भगवान शिव से मन्नत मांगी थी. लेकिन जब वो बड़ा होगा, तो शायद उसे ये कहानी जरूर सुनाई जाएगी कि 'जब तुम 5 साल के थे, तब तुम्हारे पिता तुम्हें अपने साथ कांवड़ यात्रा पर लेकर गए थे.'

सिर्फ यह यात्रा नहीं, संस्कार का हिस्सा है
प्रयागराज के घाटों पर ऐसे कई परिवार नजर आ रहे हैं, जो अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर कांवड़ यात्रा पर पहुंचे हैं. किसी पिता ने बेटे को कांवड़ थमा रखी है. किसी ने बच्चे का हाथ पकड़ रखा है. कहीं मां-बाप दोनों बच्चे के साथ चल रहे हैं. बच्चे छोटे हैं. उनके लिए रास्ता लंबा है. लेकिन परिवारों के लिए ये सिर्फ यात्रा नहीं, संस्कार का हिस्सा है. सोनू चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनी परंपरा को सिर्फ सुनें नहीं, उसे जिएं भी. अब सोनू और उनका बेटा प्रयागराज से गंगाजल लेकर काशी की ओर निकल चुके हैं. आगे लंबा रास्ता है. पैर थकेंगे. कंधे दुखेंगे. लेकिन सोनू के पास एक वजह है चलते रहने की. सोनू की कांवड़ में सिर्फ गंगाजल नहीं है. उसमें एक पिता की आस्था है. एक मन्नत की कहानी है.

 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Advertisement