करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं सुबह से ही पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं. दिनभर बिना अन्न-जल के रहने के बाद शाम को चांद निकलने का इंतजार करती हैं. चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद ही व्रत खोलती हैं. लेकिन अगर आसमान में बादल छाए रहें और चांद दिखाई ही न दे, तो महिलाओं के मन में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर व्रत कैसे खोलें?
इस बार पश्चिमी खाड़ी में आए अर्बन चक्रवात का असर कई जगहों पर देखने को मिल रहा है. दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में बारिश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं भी चांद के दर्शन को लेकर परेशान हैं. हालांकि अगर चांद नजर न आए तो घबराने की जरूरत नहीं है. इस परिस्थिति में पूजा के नियमों को जनना जरूरी है.
करवा चौथ की पूजा का मुहूर्त
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. इस दिन महिलाएं चंद्रमा की पूजा करती हैं और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलती हैं. साल 2026 में ये दिन 29 अक्टूबर को रखा गया है. पूजा के मुहूर्त की बात करें तो इस बार दो समय शुभ माना जा रहा है
पहला- शाम 5:38 से 6:56 बजे तक.
दूसरा- अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त शाम 5:38 बजे से 7:15 बजे तक रहेगा.
अगर चांद नजर न आए तो क्या करें?
अगर आसमान में बादल होने की वजह से चांद दिखाई नहीं देता है, तो सबसे पहले अपने इलाके में चंद्रोदय का समय देख लें. कई बार चांद निकलने के बाद भी बादलों की वजह से उसके दर्शन नहीं हो पाते. ऐसी स्थिति में धार्मिक रीति-रिवाजों से पूजा करके व्रत खोल सकती है.
कुछ परिवारों में चंद्रमा दिखाई न देने पर चंद्रमा की दिशा में पूजा करने या चंद्रमा का प्रतीकात्मक रूप मानकर अर्घ्य देने की परंपरा अपनाई जाती है.
हालांकि चांद न दिखने पर जल्दबाजी में कोई फैसला न लें. पहले चंद्रोदय का समय होने तक इंतजार करें और मौसम की स्थिति देखें. यदि इसके बाद भी चांद दिखाई न दे, तो पूजा की विधि अपनाएं. व्रत खोलने के तरीके को लेकर असमंजस हो, तो परिवार के बड़ों या धार्मिक जानकार से मार्गदर्शन लें.
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