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गया के मां मंगला गौरी मंदिर में 6000 साल से जल रही अखंड ज्योति, यहां पूजा से दूर होती हैं शादी की बाधाएं और मंगल दोष

गया का मां मंगला गौरी मंदिर भस्म कूट पर्वत पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह 51 शक्तिपीठों में शामिल है. श्रद्धालु इसे पालनपीठ के नाम से भी जानते हैं. मंदिर में मां मंगला गौरी के मंगल स्वरूप की पूजा की जाती है.

Maa Mangla Gauri Temple
पंकज कुमार
  • गया ,
  • 21 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:40 PM IST

बिहार के गया में भस्म कूट पर्वत पर स्थित मां मंगला गौरी मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां पूजा करने से मंगल दोष, विवाह में आने वाली बाधाएं और जीवन की कई परेशानियां दूर होती हैं. मंदिर के गर्भगृह में जल रही अखंड ज्योति भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है.

51 शक्तिपीठों में शामिल है मां मंगला गौरी मंदिर
गया का मां मंगला गौरी मंदिर भस्म कूट पर्वत पर स्थित है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह 51 शक्तिपीठों में शामिल है. श्रद्धालु इसे पालनपीठ के नाम से भी जानते हैं. मंदिर में मां मंगला गौरी के मंगल स्वरूप की पूजा की जाती है. खासतौर पर सावन के महीने में यहां भक्तों की बड़ी भीड़ उमड़ती है.

सावन के मंगलवार को पूजा का विशेष महत्व
मंदिर के पुजारी आकाश गिरी के अनुसार सावन के प्रत्येक मंगलवार को मां मंगला गौरी की पूजा करने का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता है कि मंगल ग्रह से जुड़ी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को माता की आराधना से लाभ मिलता है. सावन में लगातार चार मंगलवार पूजा करने से मंगल दोष के प्रभाव कम होने की मान्यता है.

विवाह में बाधा दूर होने की भी मान्यता
मां मंगला गौरी मंदिर में विवाह की इच्छा रखने वाले युवक और युवतियां भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. मान्यता है कि जिन लोगों के विवाह में बार-बार बाधा आती है या विवाह में देरी हो रही है, उन्हें यहां पूजा करने से लाभ मिलता है. इसके अलावा आर्थिक परेशानियों, कर्ज, क्रोध और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं से राहत मिलने की भी धार्मिक मान्यता है.

सदियों से जल रही अखंड ज्योति
मंदिर के गर्भगृह में अखंड ज्योति लगातार जलती आ रही है. पुजारी के अनुसार यह ज्योति कब से जल रही है, इसकी निश्चित तिथि बताना संभव नहीं है. हालांकि, स्थानीय मान्यता के अनुसार मंदिर में यह अखंड ज्योति करीब 6000 वर्षों से जल रही है. पुजारी ने बताया कि उनके परिवार की करीब दस पीढ़ियां मां मंगला गौरी की सेवा करती आ रही हैं.

अग्नि को माना जाता है प्रथम गुरु
मंदिर में जल रही अखंड ज्योति को भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता के अनुसार अग्नि शुद्धि और ऊर्जा का प्रतीक है. हिंदू धार्मिक परंपरा में अग्नि को प्रथम गुरु और देव स्वरूप माना गया है. इसी आस्था के साथ श्रद्धालु अखंड ज्योति के दर्शन कर मां मंगला गौरी से सुख, शांति और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं.

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