Makar Sankranti 2026 Snan Muhurat: मकर संक्रांति पर स्नान करने के क्या है सबसे अच्छा मुहूर्त, जानें इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाने के फायदे

Makar Sankranti 2026 Snan Muhurat: मकर संक्रांति इस साल 14 जनवरी को है. इसी दिन षटतिला एकादशी भी है, जिससे मकर संक्रांति पर्व का महत्व और बढ़ गया है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति पर गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान करने सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त क्या है?

Makar Sankranti ( File Photo: PTI)
मिथिलेश कुमार सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 12 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 10:59 PM IST

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का पर्व हर साल जब सूर्यदेव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मनाया जाता है. मकर संक्रांति के दिन से ही सूर्य भगवान उत्तरायण होने लगते हैं, जिससे दिन बड़ा होने लगता है. मकर संक्रांति के दिन गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान किया जाता है. इसके बाद दान-पूण्य किया जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. 

किस दिन मनाया जाएगा मकर संक्रांति का पर्व 
इस साल मकर संक्रांति की सही तिथि को लेकर कई लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. कुछ लोग इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को तो कुछ लोग 15 जनवरी को मनाने की बात कर रहे हैं. दरअसल, इस साल 14 जनवरी को दोपहर 3:13 बजे सूर्यदेव धनु राशि से निकल मकर राशि में प्रवेश करेंगे. शास्त्रों के मुताबिक संक्रांति के समय से 8 घंटे पहले और 8 घंटे बाद का समय पुण्यकाल माना जाता है. पुण्यकाल में स्नान करना काफी शुभ होता है. चूंकि सूर्य भगवान का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की दोपहर को हो रहा है, इसलिए मुख्य रूप से 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति मनाई जाएगी. उदयतिथि मानने वाले लोग 15 जनवरी को भी दान-पुण्य और स्नान करेंगे. इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. करीब 23 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार संक्रांति और एकादशी का एक साथ होना अक्षय पुण्य फलदायक माना जाता है. इस दिन किया गया दान, स्नान और पूजा लंबे समय तक फल देने वाला माना गया है.

क्या है मकर संक्रांति पर स्नान करने का शुभ मुहूर्त 
14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति पर विशेष पुण्यकाल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर शाम 5:20 बजे तक रहेगा. इसी समय को महापुण्यकाल भी माना गया है. इस समय किए गए स्नान, दान और पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है. ऐसे में आप इस समय स्नान कर सकते हैं. शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. इस बार मकर संक्रांति पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:51 बजे से लेकर सुबह 5:44 बजे तक रहेगा, यह समय स्नान और ध्यान को बहुत अच्छा है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर प्रयागराज संगम में स्नान करने से पापों और नकारात्मकता से मुक्ति मिलती है. मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है. जीवन में सुख-समृद्धि आती है. 

मकर संक्रांति का महत्व
पुराण के मुताबिक मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने आते हैं, जो मकर राशि के स्वामी हैं. मकर संक्रांति भगवान विष्णु की असुरों पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है. मकर संक्रांति के दिन से खरमास खत्म होता है और शुभ व मांगलिक कार्यों की शुरुआत होती है. मकर संक्रांति का वर्णन्न महाभारत में भी मिलता है. भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में बाणों की शैया पर पड़े रहे और इसी काल में उन्होंने देह त्याग की. एक अन्य कथा के मुताबिक इसी दिन गंगा जी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में मिली थीं. खगोलशास्त्र के मुताबिक सूर्य का दो अयन पहला उतरायण और दूसरा दक्षिणायन है. एक वर्ष में 12 महीने होते हैं और सूर्य के दो अयन होने के कारण एक अयन की अवधि 6 महीने की होती है. मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उतरायण होते हैं और आगे 06 महिना तक सूर्य उतरायण ही रहते हैं. मान्यता यह है जब सूर्य उतरायण होते है तो देवताओं का दिन की शुरुआत माना जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मकर संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करने से कई जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है. इस दिन गंगा सहित अन्य नदियों में हजारों लोग आस्था की डुबकी लगाते हैं. इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल और अन्न दान का विशेष महत्व है.

मकर संक्रांति के दिन क्या करें
1. मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त में गंगा या फिर किसी अन्य पवित्र जल तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए.
2. यदि गंगा में स्नान करने के लिए जाना संभव न हो तो पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
3. इस दिन स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनें. इसके बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें.
4. अर्घ्य के जल में रोली, चावल और लाल पुष्प डालें. ऊं घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करें.
5. तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी और मौसमी व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें.
6. श्रद्धा अनुसार मंदिर के पुजारी या किसी गरीब को दान करें.
7. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि इन कामों को करने से सूर्य देव की कृपा से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है.


 

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