Makar Sankranti
Makar Sankranti
इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी. इस बार मकर संक्रांति के साथ-साथ षटतिला एकादशी भी एक ही दिन पड़ रही है. यह घटना सालों में कम ही देखने को मिलती है. जहां मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी बनाना, उसका भोग लगाना और जरूरतमंदों को दान करना परंपरा रही है, वहीं एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजें जैसे खिचड़ी या चावल का दान वर्जित माना जाता है.
मकर संक्रांति पर बनाई जाती है खिचड़ी
मकर संक्रांति हिन्दू धर्म में सूर्य की उत्तरायण यात्रा के शुभ आरंभ का प्रतीक है. इस दिन खासतौर पर खिचड़ी बनाई जाती है और इसे देवी-देवताओं को भोग लगाने के साथ-साथ जरूरतमंदों में बांटा जाता है. माना जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. वहीं एकादशी व्रत में चावल का सेवन या दान करना वर्जित होता है. ऐसे में इस बार श्रद्धालुओं के मन में सवाल पैदा हो गया है कि आखिर मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाई जाए या नहीं.
पूजा और दान कर सकते हैं
ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दुर्लभ संयोग में श्रद्धालु परंपराओं का ध्यान रखते हुए पूजा और दान कर सकते हैं. अगर आप खिचड़ी नहीं बना सकते, तो आप अन्य वस्तुओं का दान कर सकते हैं. इनमें फल, सूखे मेवे, वस्त्र, अक्षत (चावल के दाने बिना पकाए) और अन्य सामग्री शामिल हैं. इस तरह आप एकादशी के नियमों का पालन भी कर पाएंगे और मकर संक्रांति का पुण्य भी प्राप्त कर सकेंगे.
खिचड़ी का सेवन खुद न करें
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन घर में हल्का-फुल्का भोजन करें और दान व पूजा में संयम बरतें. अगर श्रद्धालु मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने की परंपरा को निभाना चाहते हैं, तो वे खिचड़ी का सेवन खुद न करें बल्कि इसे जरूरतमंदों को दान के रूप में दे सकते हैं. इससे दोनों पर्वों का महत्व बना रहता है और धार्मिक नियमों का उल्लंघन नहीं होता.
सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व
नातन धर्म में मकर संक्रांति का धार्मिक, सांस्कृतिक और खगोलीय महत्व अत्यधिक माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस समय किया गया दान और पुण्य कई गुना फल देता है. इस साल 14 जनवरी को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे. इसी समय सूर्य का उत्तरायण आरंभ होगा और खरमास का समापन होगा, जिसे शुभ कार्यों की नई शुरुआत के रूप में देखा जाता है.