Margashirsha Mahina: मार्गशीर्ष मास हिंदू पंचांग का नौवां महीना है, जिसे अग्रहायन या अगहन भी कहा जाता है. यह महीना भगवान श्रीकृष्ण का अत्यंत प्रिय माना गया है. गीता के दसवें अध्याय में श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है, 'मासों में मैं मार्गशीर्ष हूं'. इस महीने में जप, तप, ध्यान और उपासना का विशेष महत्व है. श्रीकृष्ण भक्तों के लिए यह महीना अत्यंत पावन और फलदायक होता है.अगहन मास की शुरुआत 6 नवंबर 2025 दिन गुरुवार से हो गई है. यह महीना 4 दिसंबर 2025 दिन गुरुवार के के दिन समाप्त होगा.
मार्गशीर्ष मास का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में मार्गशीर्ष मास को विशेष बताया है. इस महीने में जप, तप और ध्यान से जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. ज्योतिष के अनुसार, इस महीने में पवित्र नदियों में स्नान करना और विष्णु सहस्रनाम, गीता और गजेंद्र मोक्ष का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है.
श्रीकृष्ण की उपासना के लाभ
मार्गशीर्ष मास में श्रीकृष्ण की उपासना से जीवन में धन, वैभव, सुख और यश की वृद्धि होती है. इस महीने में श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' और 'ओम कृष्णाय नमः' जैसे मंत्रों का जाप करने से भगवान की कृपा प्राप्त होती है.
धार्मिक अनुष्ठानों का महत्व
इस महीने में यज्ञ, हवन और अनुष्ठान करना शुभ माना गया है. संध्याकाल में दीपक जलाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. भागवत कथा सुनने और भजन-कीर्तन करने से भक्तों को ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है.
सावधानियां और नियम
मार्गशीर्ष मास में सात्विकता का पालन करना आवश्यक है. ब्रह्मचर्य का पालन, कठोर वचन से बचना, जीवों पर दया करना और दान करना इस महीने के महत्वपूर्ण नियम हैं. इस महीने में तेल की मालिश और मोटे वस्त्रों का उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है.
श्रीकृष्ण की कृपा पाने के उपाय
मार्गशीर्ष मास में श्रीकृष्ण की उपासना के लिए तुलसी के पत्तों का भोग लगाना और पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना गया है. 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है. मार्गशीर्ष मास में श्रीकृष्ण की भक्ति और उपासना से जीवन में सभी प्रकार के बंधनों से मुक्ति मिलती है. यह महीना हर हिंदू के लिए विशेष महत्व रखता है. श्रीकृष्ण की कृपा से जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए इस महीने में जप, तप और ध्यान का पालन करें.