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Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने का क्या है महत्व, इस दिन क्यों रखा जाता है मौन व्रत? यहां जान लीजिए इस पर्व से जुड़ी हर जानकारी

Mauni Amavasya Maun Vrat: मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को है. इस दिन मौन व्रत रखा जाता है. गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान किया जाता है. गरीबों को दान किया जाता है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर स्नान-दान और मौन व्रत का क्या है महत्व?

Mauni Amavasya 2026 (Photo: PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

हिंदू धर्म में मौनी अमावस्या को पवित्र दिन माना जाता है. हर साल मौनी अमावस्या माघ महीने की अमावस्या को आती है. इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा सहित पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान, ध्यान, दान और मौन व्रत रखने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं.

मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रहना सबसे बड़ा तप माना जाता है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या पर स्नान-दान और मौन व्रत का क्या है महत्व? मौनी अमावस्या कि दिन प्रयागराज में त्रिवेणी संगम तट, काशी में गंगा नदी और हरिद्वार में आस्था की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं. श्रद्धालु मौनी अमावस्या के दिन भगवान विष्णु, महादवे, सूर्यदेव और मां गंगा की आराधना करते हैं. इसकी के साथ अपने पूर्वजों की कृपा पाने के लिए विशेष उपाय करते हैं. ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर मौन रहकर की जाने वाली साधना जल्दी सफल होती है. 

कब है मौनी अमावस्या
पंचांग के मुताबिक माघ महीने की अमावस्या तिथि 17 जनवरी की रात 12:05 बजे से शुरू होगी और इसका समापन 18 जनवरी की रात 1 बजकर 22 मिनट पर होगा. उदयातिथि के मुताबिक मौनी अमावस्या का पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा. 18 जनवरी को सुबह 10:14 बजे से लेकर अगले दिन 19 जनवरी सुबह 7:31 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा.

इसके अलावा हर्षण योग और शिव वास योग भी रविवार को पूरे दिन बने रहेंगे. इतना ही नहीं, पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का शुभ संयोग भी रहेगा, यह समय स्नान, दान और पूजा-पाठ के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी का जल अमृत के समान पुण्यदायक होता है. इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने और इसके बाद दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है. 

मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने का महत्व
मौनी अमावस्या के दिन कई लोग सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक मौन व्रत रखते हैं. यदि आप पूरे दिन मौन व्रत नहीं रख पा रहे हैं तो कम से कम स्नान करने के दौरान मौन जरूर रहें. पुराणों और ज्योतिष के मुताबिक मौन व्रत रखने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन में स्थिरता आती है. मौनी अमावस्या के दिन लोग मौन व्रत धारण कर अपने मन और चित्त को शुद्ध करते हैं. इससे सकारात्मक सोच और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है.

पुराणों के मुताबिक मौनी अमावस्या का संबंध मनु महाराज से है. मानव जाति का पहला पुरुष मनु को माना जाता है. माना जाता है कि मनु महाराज ने मौनी अमावस्या के दिन मौन रहकर भगवान की तपस्या की थी और अपने मन को शुद्ध किया था. उन्हीं के नाम पर इस दिन को मौनी अमावस्या कहा गया. मौनी अमावस्या के दिन लोग मौन रहकर अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखते हैं. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन देवता और पूर्वज धरती पर आते हैं. इस दिन मौन रहकर किया गया स्नान, दान और पूजा उन्हें जल्दी प्रसन्न करती है. मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत के साथ किया गया दान कई गुना फल देता है.

 

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