Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या है आज, जानें स्नान-दान, पितृ तर्पण और पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल मौनी अमावस्या पर काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. इस अवधि में स्नान-दान और तर्पण करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति हो सकती है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या की तिथि, दान- स्नान का शुभ मुहूर्त, मंत्र सहित अन्य जानकारी…

Mauni Amavasya shubh muhurat
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 18 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:23 AM IST

Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या या माघ अमावस्या का दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. मान्यता है कि आज के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने, दान-पुण्य करने, भगवान विष्णु और पितरों की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. वहीं इस साल मौनी अमावस्या पर काफी शुभ योगों का निर्माण हो रहा है. इस अवधि में स्नान-दान और तर्पण करने से कई गुना अधिक फलों की प्राप्ति हो सकती है. आइए जानते हैं मौनी अमावस्या की तिथि, दान- स्नान का शुभ मुहूर्त, मंत्र सहित अन्य जानकारी…

मौनी अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 05:32 AM से 06:23 AM तक
प्रात: संध्या: 05:58 AM से 07:15 AM तक
अभिजीत मुहूर्त: 12:27 PM से 01:11 PM तक
पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान के लिए शुभ मुहूर्त: 11:30 AM से 02:30 AM तक

स्नान की विधि और नियम
मौनी अमावस्या के दिन शुभ मुहूर्त में स्नान करें. नदी में स्नान करते समय तीन बार डुबकी लगाकर सूर्यदेव की ओर मुख करें. साथ ही हाथ में जल लेकर अर्घ्य अर्पित करें. स्नान और अर्घ्य के समय अपने इष्ट देव का ध्यान करें और पितरों का स्मरण अवश्य करें. जो लोग घर पर स्नान कर रहे हैं, वे नहाने के पानी में गंगाजल मिलाएं. स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल, तिल और फूल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें. इसके बाद कुछ समय के लिए मौन रखें. मान्यता है कि आज कुछ घंटों का मौन भी बड़ा पुण्य देता है.

मौनी अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा
मौनी अमावस्या पर तुलसी की तरह पीपल के पेड़ की पूजा भी अत्यंत ही शुभ और फलदायी मानी गई है. ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष में दूध मिला जल अर्पित करने के साथ दीपदान और परिक्रमा अवश्य करें. मौनी अमावस्या के पर्व को पितरों की पूजा के लिए उत्तम माना गया है. ऐसे में इस दिन विशेष रूप से पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि करना चाहिए. यदि ये न संभव हो पाए तो पितरों के निमित्त अन्न, धन और गरम वस्त्र का दान करें. 

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