पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक का कहना है कि विंध्याचल में नवरात्र के दौरान लाखों की संख्या में भक्त मां विंध्यवासिनी के दर्शन पूजन करने आते हैं. इसके लिए मेला क्षेत्र को 10 जोन और 21 सेक्टर में विभाजित किया गया है. इसमें सुरक्षा के लिए 3 कंपनी पीएसी लगाई गई हैं. फ्लड पुलिस भी तैनात की गई है. इसके अलावा अपराधियों की एंट्री न हो, इसके लिए खास इंतजाम किए गए हैं. 10 मोबाइल यूनिट मेला क्षेत्र में मौजूद रहेंगी. मेला क्षेत्र में 200 ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है. 22 पार्किंग की व्यवस्था की गई है. सादे वर्दी में पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई है. मेला क्षेत्र में 200 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. मां विंध्यवासिनी को लेकर कई कथा प्रचलित है. आइए उन्हें विस्तार से समझते हैं.
मां भगवती विंध्यवासिनी की कथा
यूपी टूरिज्म के मुताबिक, भगवती विंध्यवासिनी को महाशक्ति माना जाता है. कहा जाता है कि वह सृष्टि की मूल और सर्वोच्च शक्ति हैं, जिनसे ये ब्रह्मांड संचालित होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विंध्याचल पर्वत को मां विंध्यवासिनी का स्थायी निवास स्थान कहा जाता है. यही कारण है कि यह स्थान एक जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जहां माना जाता है कि देवी यहां 24 घंटे उपस्थिति रहती हैं.
महाभारत के विराट पर्व में धर्मराज युधिष्ठिर ने देवी की स्तुति करते हुए कहा है कि 'हे माता, आप पर्वतों में श्रेष्ठ विंध्याचल पर सदा विराजमान रहती हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन काल से ही इस स्थान का धार्मिक महत्व रहा है. पद्मपुराण में भी देवी को 'विंध्यवासिनी' नाम से संबोधित किया गया है, जिसका अर्थ है विंध्य पर्वत में निवास करने वाली देवी.
श्रीमद् देवीभागवत में एक कथा मिलती है, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्माजी ने मनु और शतरूपा को उत्पन्न किया. विवाह के बाद मनु ने स्वयं अपने हाथों से देवी की प्रतिमा बनाकर सौ वर्षों तक कठोर तपस्या की. उनकी इस तपस्या और भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें सुखी और निर्बाध राज्य, वंश वृद्धि और अंत में मोक्ष का आशीर्वाद दिया.
अन्य मान्यता
इसके अलावा लोगों की मान्यता है कि यह जगह मां सती के 51 शक्ति पीठों में से एक है. लोग यह भी मानते हैं कि जब कंस ने भ्रम वश देवकी और वासुदेव की आठवीं कन्या संतान को मारने की कोशिश की तब, माता योगमाया उसके हाथों से छूट गईं. छूटने के बाद कंस को चेतावनी देने के बाद विंध्याचल पर्वत पर आ कर वस गईं.
मान्यता जो भी हो लेकिन हर मान्यता में मां आदी शक्ति का जिक्र आता है और हजारों सालों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. ऐसे तो आम दिनों में भी मंदिर में बहुत भीड़ रहती है. लेकिन नवरात्रि के शुभ अवसर पर विंध्याचल में भक्ति के अनूठे रंग देखने को मिलते हैं.
(इनपुट सुरेश कुमार सिंह)
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