मोक्षदा एकादशी हर साल मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है. इस दिन कुरुक्षेत्र के युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इस दिव्य घटना की स्मृति में हर वर्ष इसी दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है. इस बार गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी 1 दिसंबर 2025 को मनाई जा रही है.
क्या है मोक्षदा एकादशी का महत्व
मोक्षदा एकादशी को मोक्ष प्राप्ति का दिन कहा जाता है. इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था. इस दिन पूजा उपासना से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति सम्भव होती है. इस दिन दान करने का फल अनंत गुना मात्र में प्राप्त होता है. इस दिन भगवान विष्णु और प्रभु श्रीकृष्ण की आराधना और गीता का पाठ करने से भक्त को सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है.
कैसे उपासना करें मोक्षदा एकादशी पर
1. प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें.
2. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और प्रभु श्रीकृष्ण की पूजा करें.
3. भगवान को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें.
4. इसके बाद भगवान कृष्ण के मंत्रों का जप करें. भगवद्गीता का पाठ करें.
5. किसी निर्धन व्यक्ति को वस्त्रों या अन्न का दान करें.
6. इस दिन वैसे तो निर्जल उपवास रखना उत्तम होता है लेकिन आवश्यकता होने पर जलीय आहार और फलाहार लिया जा सकता है.
7. मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने वाले द्वादशी तिथि के सूर्योदय के बाद ही व्रत का पारण करें.
गीता जयंती का क्या है महत्व
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था. इसी दिन को गीता जयंती के नाम से मनाया जाता है. गीता मात्र एक पुस्तक नहीं है बल्कि यह उपदेशों का जीवंत स्वरुप है अतः इसकी जयंती मनाई जाती है. इसके उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने पूर्व में थे. अतः हर काल में जीवंत होने के कारण भी इसकी जयन्ती मनाई जाती है. इस दिन गीता के पाठ से मुक्ति मोक्ष और शान्ति का वरदान मिलता है. गीता के पाठ से जीवन की ज्ञात-अज्ञात समस्याओं से मुक्ति मिल जाती है. इस दिन गीता का पाठ करना चाहिए. संभव हो तो गीता की प्रति का दान करना चाहिए.