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काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर होगा बाबा गरीबनाथ मंदिर का विकास, फर्स्ट फेज को बिहार सरकार ने दी मंजूरी

बिहार में मुजफ्फरपुर के फेमस शिवधाम बाबा गरीबनाथ मंदिर का विकास काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर किया जाएगा. बिहार सरकार ने गरीबनाथ कॉरिडोर परियोजना के फर्स्ट फेज को मंजूरी दे दी है. इसके लिए 6.19 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है.

Baba Garibnath temple
मणि भूषण शर्मा
  • मुजफ्फरपुर,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 12:59 PM IST

उत्तर बिहार के प्रसिद्ध शिवधाम बाबा गरीबनाथ मंदिर के विकास को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. बिहार सरकार ने बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर परियोजना के पहले चरण को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है. पर्यटन विभाग ने पहले फेज के लिए ₹6.19 करोड़ की मंजूरी दी है, जबकि ₹2 करोड़ की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है. सावन माह समाप्त होने के बाद कॉरिडोर निर्माण का काम शुरू किया जाएगा.

काशी विश्वनाथ की तर्ज पर होगा गरीबनाथ मंदिर का विकास-
पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने बताया कि बाबा गरीबनाथ मंदिर का विकास वाराणसी के काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की तर्ज पर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि पहलेजा घाट से बाबा गरीबनाथ मंदिर तक कांवड़ियों की सुविधा के लिए छह टेंट सिटी बनाई गई हैं, जहां ठहरने, शौचालय, पेयजल, गर्म पानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पर्यटन विभाग स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं.

पहले चरण में क्या होगा?
परियोजना के पहले चरण में मंदिर के शिखर और अग्रभाग का सौंदर्यीकरण, भव्य प्रवेश द्वार, आधुनिक शौचालय, साहू पोखर का विकास, आकर्षक लाइटिंग, पाथवे, रेलिंग, चहारदीवारी और आरती डेक का निर्माण किया जाएगा. गांधी चौक और साहू पोखर की ओर दो भव्य प्रवेश द्वार भी बनाए जाएंगे. इस परियोजना का कार्यान्वयन बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) करेगा और इसे 12 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा-
बाबा गरीबनाथ मंदिर उत्तर बिहार का प्रमुख आस्था केंद्र है, जहां सावन में लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और धार्मिक पर्यटन के साथ स्थानीय कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

कॉरिडोर को मंजूरी मिलने पर मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने खुशी जताते हुए कहा कि लंबे समय से श्रद्धालु और मंदिर परिवार इस परियोजना का इंतजार कर रहे थे. वहीं स्थानीय लोगों ने भी इसे मुजफ्फरपुर के विकास और धार्मिक पर्यटन के लिए ऐतिहासिक कदम बताया.

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