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Nag Panchami 2026: 16 या 17 अगस्त... किस दिन है नाग पंचमी, जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Nag Panchami 2026 Date: नाग पंचमी के दिन भगवान शंकर और नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है. हर साल नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन पूजन से श्रद्धालु के समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आइए जानते हैं कि इस बार नाग पंचमी का त्योहार किस दिन पड़ रहा है.

Nag Panchami 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:45 AM IST

Nag Panchami: सनातन धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व बताया गया है. हर साल नाग पंचमी का पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है. नाग पंचमी के दिन भगवान शंकर और नाग देवता की पूजा-अर्चना की जाती है.

ऐसी धार्मिक मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव और नाग देवता की पूजा करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी होती हैं. कालसर्प दोष के प्रभाव को कम हो जाता है या खत्म हो जाता है. यहां आप जान सकते हैं इस साल कब नाग पंचमी है और पूजा विधि क्या है? नाग पंचमी के दिन लोग उपवास रखते हैं और नाग देवता की पूजा-अर्चना के साथ व्रत कथा का पाठ करते हैं.

नाग पंचमी का पर्व कब
हिंदू पंचांग के मुताबिक सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है. इस बार सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त को शाम 04:52 से शुरू होगी और इसका समापन 17 अगस्त को शाम 5 बजे होगा. उदया तिथि के आधार पर नाग पंचमी का पर्व 17 अगस्त दिन सोमवार को मनाया जाएगा. 17 अगस्त को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:04 बजे से सुबह 08:39 बजे तक रहेगा.

नाग पंचमी के दिन ऐसे करें पूजा 

  • नाग पंचमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए.
  • इसके बाद घर के मुख्य प्रवेश द्वार या पूजा स्थान पर गोबर अथवा मिट्टी से नाग देवता का प्रतीक बनाएं.
  • फिर नाग देवता को फूल, दूध और अन्य नैवेद्य अर्पित करें. 
  • इसके बाद धूप और दीप जलाकर विधिवत पूजा करें
  • फिर आरती उतारें तथा अंत में नाग पंचमी की कथा का श्रवण करें. 

 नाग पंचमी पर शिवलिंग पर चढ़ाएं जल

  • नाग पंचमी के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करना चाहिए. 
  • शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करना शुभ माना जाता है. 
  • पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना चाहिए. 
  • जलाभिषेक के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करना शुभ माना गया है.

 

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