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9 कन्याएं नहीं मिल रहीं तो क्या करें? जानिए नवरात्रि में कितनी कन्याओं को भोजन कराना माना जाता है शुभ

कन्या पूजन को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि कितनी कन्याओं को भोजन कराना शुभ माना जाता है. क्या 9 कन्याओं को खिलाना जरूरी है या कम संख्या में भी कन्या पूजन किया जा सकता है? तो चलिए आपकी सारी कन्फ्यूजन दूर करते हैं.

Kanya Pujan (File Photo: PTI)
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 07 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 9:40 AM IST

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ कन्या पूजन की परंपरा भी बेहद खास मानी जाती है. अष्टमी और नवमी के दिन छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोए जाते हैं, तिलक किया जाता है और भोजन कराया जाता है. इसके बाद कन्याओं को दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लिया जाता है. लेकिन कन्या पूजन को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि कितनी कन्याओं को भोजन कराना शुभ माना जाता है. क्या 9 कन्याओं को खिलाना जरूरी है या कम संख्या में भी कन्या पूजन किया जा सकता है? तो चलिए आपकी सारी कन्फ्यूजन दूर करते हैं.

9 कन्याओं को खिलाने की है खास मान्यता
धार्मिक परंपराओं में 9 कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है. इसलिए नवरात्रि में 9 कन्याओं को भोजन कराना सबसे प्रमुख परंपरा मानी जाती है. कई घरों में 9 कन्याओं के साथ एक बालक को भी भोजन कराया जाता है. इस बालक को लांगुरिया या भैरव का स्वरूप माना जाता है. हालांकि, अगर किसी वजह से 9 कन्याएं एक साथ नहीं मिल पाती हैं तो कन्या पूजन रोकने की जरूरत नहीं है. श्रद्धा के अनुसार कम संख्या में भी कन्याओं का पूजन और भोजन कराया जा सकता है. कई परंपराओं में 2, 3, 5, 7 या एक कन्या को भी पूजने की मान्यता है.

कितनी उम्र की कन्याओं का करें पूजन?
कन्या पूजन के लिए आमतौर पर 2 से 9 साल की बच्चियों को उपयुक्त माना जाता है. कुछ परंपराओं में 10 साल से कम उम्र की बच्चियों को भी कुमारी पूजा में शामिल किया जाता है. मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं में देवी के अलग-अलग स्वरूपों का प्रतीक देखा जाता है.

कन्या पूजन में क्या करना चाहिए?
कन्याओं को घर बुलाकर सबसे पहले उनके पैर धोए जाते हैं और उन्हें सम्मानपूर्वक आसन पर बैठाया जाता है. इसके बाद माथे पर रोली या कुमकुम का तिलक लगाया जाता है. उन्हें पूरी, काले चने और हलवा जैसे पारंपरिक व्यंजन खिलाए जाते हैं. भोजन के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा, फल, मिठाई, वस्त्र या उपयोगी उपहार दिए जा सकते हैं. माना जाता है कि कन्या पूजन में संख्या से ज्यादा श्रद्धा और सम्मान का महत्व होता है.

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