सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है. वर्ष में वैसे तो कुल 24 एकादशियां होती हैं लेकिन अधिक मास में एकादशियों की संख्या बढ़ जाती हैं. इस साल अधिक मास होने के कारण कुल 26 एकादशी होंगी. अधिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी कहा जाता है.
इसका पालन करने से यज्ञ, व्रत और तपस्या का फल मिलता है. इसके साथ ही मनोवांछित संतान की प्राप्ति होती है. अधिकमास में पड़ने वाली एकादशी को व्रत रखने से हजारों यज्ञ और तीर्थ स्थानों के भ्रमण के बराबर फलों की प्राप्ति होती है. अधिकमास में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी को कमला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.
कब रखा जाएगा पद्मिनी एकादशी व्रत
हिंदू पंचांग के मुताबिक अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 26 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट से होगी और इसका समापन 27 मई को सुबह 6 बजकर 22 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई को रखा जाएगा. व्रत का पारण 28 मई की सुबह किया जाएगा.
पद्मिनी एकादशी पूजा मुहूर्त
पद्मिनी एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त ब्रह्रा मुहूर्त 27 मई को सुबह 04 बजकर 03 मिनट से लेकर 04 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 07 बजकर 08 मिनट से लेकर 08 बजकर 52 मिनट तक और शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 10 बजकर 35 मिनट से लेकर 12 बजकर 18 मिनट तक के बीच भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का पूजन किया जा सकता है.
क्या है पद्मिनी एकादशी का पूजा विधान?
1. इस दिन प्रातः स्नान करके पूजा का संकल्प लें.
2. दिन भर भगवान विष्णु और शिव जी की उपासना करें.
3. रात्रि में चार पहर की पूजा करें.
4. पहले पहर में भगवान की पूजा नारियल से, दूसरे पहर में बेल से, तीसरे पहर में सीताफल से और चौथे पहर में नारंगी और सुपारी से करें
5. अगले दिन सुबह पुनः भगवान की पूजा करें.
6. निर्धनों को अन्न और वस्त्र का दान करें.
पद्मिनी एकादशी पर संतान प्राप्ति के लिए क्या प्रयोग करें?
पति-पत्नी एक साथ भगवान कृष्ण की पूजा करें. भगवान को पीले पुष्प और पीला फल अर्पित करें. इसके बाद ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का यथाशक्ति जप करें. संतान प्राप्ति के लिए प्रार्थना करें. अर्पित किया हुआ फल, पति-पत्नी प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.
पाप नाश और तपस्या की फल प्राप्ति के लिए क्या करें?
रात्रि में पूजन की व्यवस्था करें. भगवान के समक्ष एक घी का दीपक जलाएं. इसके बाद गीता का पाठ करें या गीता के ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें.पापों के प्रायश्चित के लिए याचना करें.