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Papankusha Ekadashi 2026: 21 या 22 अक्टूबर 2026 में कब है पापांकुशा एकादशी... जानें व्रत विधि और पूजा का तरीका

आश्विन शुक्ल पक्ष की पापांकुशा एकादशी 21 अक्टूबर को दोपहर 2:12 बजे शुरू होकर 22 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:48 बजे समाप्त होगी. जानें ऐसे में एकादशी की सटीक तिथि क्या है.

पापांकुशा एकादशी 2026
gnttv.com
  • नई दिल्ली,
  • 16 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:15 PM IST

आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित व्रत है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, और भगवान हरि की पूजा कर सुख-शांति की कामना उनसे करते हैं. पापांकुशा एकादशी आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाली एक तिथि है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कर पुण्य की कमाना करते है. पापांकुशा का अर्थ ही है पाप पर अंकुश लगाने वाला व्रत. 

 लेकिन इस बार एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में काफी कंफ्यूजन है. कोई श्रद्धालु 21 अक्टूबर को व्रत रखने का सोच रहा, तो कुछ लोग सोच रहे कि 22 अक्टूबर को एकादशी है. चलिए हम आपके कंफ्यूजन को दूर कर देते हैं. आपको बताते हैं कि पापांकुशा एकादशी कब है, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन पूजा कैसे करनी चाहिए.

21 या 22 अक्टूबर, किस दिन रखा जाएगा व्रत?
पापांकुशा एकादशी की तारीख को लेकर उलझन की वजह तिथि का समय है.  दरअसल एकादशी तिथि 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:12 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:48 बजे समाप्त होगी. यानी तिथि की शुरुआत 21 अक्टूबर को होगी, लेकिन उदया तिथि के मुताबिक व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को ही रखा जाएगा. 

हिंदू पंचांग में व्रत की तारीख तय करने के लिए सिर्फ तिथि शुरू होने का समय नहीं देखा जाता, बल्कि सूर्योदय के समय तिथि की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है. इसी वजह से एकादशी की तिथि एक दिन शुरू होकर अगले दिन तक रह सकती है.

पापांकुशा एकादशी व्रत की विधि
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और दीपक जलाएं. व्रत रखने वाले लोग अपनी श्रद्धा और सेहत के अनुसार उपवास कर सकते हैं. कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं. दिनभर सात्विक आचरण रखें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को दान दें. व्रत के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और एकादशी व्रत कथा का पाठ करें.

भगवान विष्णु की पूजा का तरीका
भगवान विष्णु की पूजा के लिए उन्हें फूल, फल और तुलसी दल अर्पित करें. इसके बाद 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें. श्रद्धालु चाहें तो विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं. पूजा के दौरान भगवान विष्णु की आरती करें और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें. शाम के समय भी दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान और आरती की जा सकती है. अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को द्वादशी तिथि में पंचांग के अनुसार तय पारण समय पर भगवान का ध्यान करके व्रत खोलें. 
 

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