जीवन में कई बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब लोगों को ऑपरेशन करवाने की जरूरत पड़ जाती है. आज का मेडिकल साइंस ऑपरेशन को बेहतर इलाज का एक हिस्सा मानता है. वहीं ज्योतिष शास्त्र में भी ऑपरेशन (शल्य चिकित्सा) को लेकर कुछ खास संकेत बताए गए हैं. ज्योतिष कहती है कि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मौजूद ग्रह और राशियां इस बात का इशारा देती हैं कि क्या व्यक्ति को जीवन में कभी ऑपरेशन की जरूरत पड़ेगी.
ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को हिम्मत, ताकत और सुरक्षा का कारक माना जाता है. शरीर की मजबूती और एनर्जी का संबंध भी मंगल से जोड़ा जाता है. लेकिन मंगल केवल शक्ति ही नहीं देता, बल्कि खून, चोट और दुर्घटनाओं का भी स्वामी माना जाता है. जब यही प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य लाभ के लिए काम करता है तो यह ऑपरेशन का रूप ले सकता है. इसलिए ऑपरेशन और सर्जरी के मामलों में मंगल ग्रह की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है.
ज्योतिष के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अग्नि तत्व ज्यादा हो तो ऑपरेशन होने के चांस ज्यादा होते हैं. मेष, सिंह और धनु जैसी अग्नि राशियां इसमें खास भूमिका निभाती हैं. इसके अलावा वृश्चिक राशि का संबंध भी ऑपरेशन और गुप्त चिकित्सा प्रक्रियाओं से माना जाता है.
यदि मंगल किसी पाप प्रभाव में हो, शनि का संबंध अग्नि राशियों से बन रहा हो या छठे भाव में कई ग्रह मौजूद हों, तो व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी ऑपरेशन की स्थिति बन सकती है. हथेली पर तारा या द्वीप का चिन्ह, हथेलियों का अत्यधिक लाल होना और नाखूनों का टेढ़ा-मेढ़ा होना भी ऐसे संकेत माने जाते हैं.
ज्योतिष मानता है कि हर ऑपरेशन का योग वास्तविकता में बदल जाए, ऐसा जरूरी नहीं है. यदि कुंडली में बृहस्पति या शुक्र मजबूत हों तो व्यक्ति कई बार बड़ी सर्जरी से बच जाता है. इसी तरह केंद्र भावों में शुभ ग्रहों की उपस्थिति और अनुकूल दशा भी सुरक्षा प्रदान कर सकती है. कई मामलों में छोटी-मोटी चोट या दुर्घटना होने पर भी बड़े ऑपरेशन का योग समाप्त हो जाता है. ज्योतिष में यह भी माना जाता है कि सुबह या संध्या के समय जन्म लेने वाले कुछ लोगों को विशेष सुरक्षा मिलती है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि कुंडली में ऑपरेशन के योग दिखाई दें तो कुछ उपाय लाभकारी माने जाते हैं. लाल पुष्प अर्पित करके भगवान नृसिंह की उपासना करना शुभ माना जाता है. उनके मंत्रों का नियमित जप करने की भी सलाह दी जाती है. यथाशक्ति रक्तदान करना, दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना और महीने में एक बार पूर्णिमा का व्रत रखना भी सकारात्मक माना गया है. इसके अलावा योग्य ज्योतिषी की सलाह लेकर पुखराज या ओपल धारण किया जा सकता है.
नोटः किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह और आधुनिक चिकित्सा को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है. ज्योतिष केवल संभावनाओं और मान्यताओं पर आधारित होता है.