उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेला की रौनक निराली है. हर साल रेतीले मैदानों पर विशाल तंबू शहर बसता है, जहां पुलिस पंडाल से लेकर श्रद्धालुओं के ठहराव तक हर सुविधा उपलब्ध रहती है. इसी शहर में पिछले कई वर्षों से एक अनोखा 'राम नाम बैंक' संचालित हो रहा है. यहां नोटों की जगह राम नाम की हस्तलिखित कॉपियां जमा होती हैं. बैंक के मैनेजर ज्योतिषाचार्य आशुतोष वर्षों से इसकी देखरेख कर रहे हैं.
माघ मेले में राम नाम बैंक-
देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु राम नाम लिखी पासबुक जैसी कॉपियां जमा करते हैं, जिससे भक्ति और पुण्य की कमाई होती है. डॉ. अशोक तिवारी जैसे भक्त गवाही देते हैं. उन्होंने कहा कि हार्ट अटैक आया, तीन बार ऑपरेशन हुआ, लेकिन राम नाम लेखन के बल पर मैं पूरी तरह स्वस्थ हूं.
यह बैंक मेला की आध्यात्मिकता का प्रतीक बन चुका है. मुख्य ब्रांच सिविल लाइंस में है, जबकि माघ मेला (हर साल), अर्धकुंभ (6 साल में) और कुंभ (12 साल में) के दौरान सेक्टर-1, अक्षय वट मार्ग पर अस्थायी शाखा खुलती है.
कैसे खोल सकते हैं खाता ?
राम नाम बैंक में खाता खोलना बेहद आसान है. आप ऑनलाइन या ऑफलाइन खाता खोल सकते हैं. कोई आईडी या शुल्क नहीं चाहिए, बस अच्छे स्वभाव और कर्म नियम हैं. तामसिक भोजन (लहसुन, कच्चा प्याज, मांस, मछली, शराब) का परित्याग. सत्य बोलना और झूठ से दूर रहना. खाता खोलने पर 32 पेज की सादी कॉपी दी जाती है. खाताधारक को लाल पेन से हर पेज पर 108 बार 'राम' नाम लिखना होता है (9 के क्रम में). लाखों लोग, विदेशी भक्त सहित, इससे जुड़ चुके हैं.
हर साल माघ मेले में होता है सम्मान-
मनोकामना पूरी करने के लिए सवा लाख राम नाम लिखी कॉपी लें. पूरी होने पर दोगुना (2 लाख या अधिक) हस्तलिखित नाम लाल कपड़े में लपेटकर जमा करें. इससे पुण्यफल मिलता है. सबसे अधिक नाम लिखने वालों को हर माघ मेला में सम्मानित भी किया जाता है. आशुतोष बताते हैं कि खाता खोलने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और लाभ मिलता है. यह राम नाम बैंक आस्था और भक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो प्रयागराज के माघ मेला को और विशेष बनाता है.
(आनंद राज की रिपोर्ट)
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