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43 डिग्री तापमान में रूसी महिला की तपस्या, 10 साल पहले अपनाया था नाथ संप्रदाय, जानें इस महिला की कहानी

राजस्थान के पुष्कर में 43 डिग्री सेल्सियम तापमान में रूस की एक महिला अनोखी तपस्या कर रही है. इस महिला ने 10 साल पहले नाथ संप्रदाय अपनाया था. हालांकि अभी भी महिला के पास रूस की नागरिकता है. लेकिन वो भारत में टूरिस्ट वीजा पर रहती हैं.

Pushkar News
gnttv.com
  • पुष्कर,
  • 12 मई 2026,
  • अपडेटेड 10:31 AM IST

आपने साधु संतों को भीषण गर्मी के मौसम में अग्नि तप करते हुए देखा होगा. लेकिन राजस्थान के पुष्कर में पहली बार 43 डिग्री तापमान में रूस की महिला नौ धुनी अग्नि तप कर रही है. 3 मई से शुरू हुई महिला की यह अग्नि तपस्या 25 मई तक चलेगी. महिला की यह तपस्या देश ही नहीं, पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. दूर-दूर से लोग विदेशी महिला की तपस्या को देखने के लिए पुष्कर पहुंच रहे हैं. रूस की महिला ने 10 साल पहले नाथ संप्रदाय अपनाया था. उसके बाद से वो लगातार नाथ संप्रदाय के रीति रिवाज से अपना जीवन यापन कर रही हैं.

43 डिग्री में रूस की महिला की तपस्या-
मूल रूप से रूस की रहने वाली राधिका योगिनी अन्नपूर्णा नाथ देश ही नहीं पूरे दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है. राजस्थान की तपती हुई गर्मी में अजमेर के रेगिस्तान पुष्कर में छोटी बस्ती स्थित शमशान भूमि में अघोरी सीताराम बाबा के आश्रम पर राधिका योगिनी नो धुनियों के बीच बैठकर 21 दिवसीय अग्नि तपस्या कर रही है. उनकी यह तपस्या 25 मई तक चलेगी. इस साधना के दौरान योगिनी प्रतिदिन लगभग 3:15 घंटे तक धड़कती अग्नि के बीच बैठकर शिव साधना और गुरु बीज मंत्र का जाप कर रही है. तपस्या के साथ प्रतिदिन हवन पूजन और आरती का आयोजन भी किया जाता है. 25 मई को साधना की पूर्ण आहुति के साथ संत भंडारे का आयोजन होगा. यह तपस्या वो अपने गुरु बाल योगी दीपक नाथ रमते राम के सानिध्य में कर रही हैं. अन्नपूर्णा नाथ की यह पहली अग्नि तपस्या है. जबकि उनके गुरु पहले भी चार बार ऐसी अग्नि तपस्या कर चुके हैं.

पूरे विधि विधान से हो रही तपस्या-
प्रतिदिन विधि विधान से यह तपस्या शुरू होती है. यह साधना अन्य साधनों की तुलना में कठिन होती है. दोनों गुरु और शिष्य साधना शुरू करने से पहले भस्म लेप करते हैं और उसके बाद सुबह 11 से दोपहर 2:15 तक अग्नि की धुनी के बीच योग मुद्रा में बैठते हैं. सभी धुनी को गोबर के कंडो से प्रज्वलित किया जाता है. इसकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जा रही है. अंतिम दिन 108 कंडो का प्रयोग किया जाएगा.

17 साल पहले भारत आई थी महिला-
रूस की महिला की साधना राजस्थान व देश ही नहीं, अब विदेशों में चर्चा का विषय बनी हुई है. महिला को देखने में उनका आशीर्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पुष्कर आने लगे हैं. 17 साल पहले भारत आई थी. भारतीय संस्कृति योग और सनातन परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने अपना जीवन पूरी तरह से बदल लिया. 10 साल पहले उन्होंने नाथ संप्रदाय के योगिया से दीक्षा ली और सांसारिक जीवन त्याग कर साधना का मार्ग अपना लिया. अब उनका जीवन पूरी तरह से शिव भक्ति योग और सेवा को समर्पित है. फिलहाल उनके पास रूसी नागरिकता है और वो टूरिस्ट वीजा पर भारत में रहती हैं.

पैरों में आ गई है सूजन-
इस कठिन तपस्या के दौरान उनके पैरों में सूजन आ गई है. उन्होंने हाल ही में नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन किए थे और इसके अलावा वो इस समय 52 शक्तिपीठों की यात्रा पर हैं. अब तक 35 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं. हालांकि पाकिस्तान बांग्लादेश और श्रीलंका में स्थित कुछ शक्तिपीठ में अभी वो नहीं पहुंच सकी है. लेकिन उनकी तपस्या और उनकी भावना की चर्चा अब देश ही नहीं विदेशों में होने लगी है और सोशल मीडिया पर वो तेजी से वायरल हो रही है. उनकी तपस्या के वीडियो तेजी से लोग शेयर कर रहे हैं. 

(हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट)

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