मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के खिलचीपुर नगर में स्थित 15 फीट ऊंचे चिंतामण गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी. मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित दूर-दूर से लोग भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचे. प्राचीन मंदिर और विशाल प्रतिमा भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं.
164 साल पुराना है मंदिर
खिलचीपुर के सोमवारिया चौक को अब गणेश चौक के नाम से जाना जाता है. इसी स्थान पर चिंतामण गणेश जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है.मंदिर की स्थापना 164 वर्ष पहले हुई थी. वर्ष 1862 में रेत और चूने से भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा का निर्माण कराया गया था. 15 फीट ऊंची यह प्रतिमा अपनी प्राचीनता और निर्माण शैली के कारण खास आकर्षण का केंद्र है.
विधि-विधान से पूजा और लड्डुओं का महाभोग
गणेश चतुर्थी के अवसर पर चिंतामण गणेश जी का सुंदर श्रृंगार किया गया. धूप और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद भगवान को लड्डुओं का महाभोग लगाया गया. रात 9:30 बजे ढोल-धमाकों के साथ महाआरती हुई. इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया. महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए. गणपति बप्पा के जयकारों से मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन किए और सुख-समृद्धि की कामना की.
तिरछी प्रतिमा के पीछे जुड़ी है प्राचीन मान्यता
चिंतामण गणेश की इस विशाल प्रतिमा से एक प्राचीन मान्यता भी जुड़ी हुई है. मान्यता के अनुसार, प्रतिमा के निर्माण के समय लोगों को आशंका थी कि भगवान गणेश का चेहरा जिस दिशा में सीधा रहेगा, उस दिशा में रहने वाले लोगों पर दरिद्रता और गरीबी आ सकती है. इसी मान्यता के चलते प्रतिमा को सीधा रखने के बजाय थोड़ा तिरछा स्थापित किया गया.
मध्य प्रदेश और राजस्थान के लोगों की आस्था का केंद्र
खिलचीपुर का चिंतामण गणेश मंदिर मध्य प्रदेश और राजस्थान के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. गणेश चतुर्थी के मौके पर यहां बड़ी संख्या में भक्त भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. वहीं, गाड़ गंगा नदी तट पर स्थित भगवान गणेश की दूसरी प्रतिमा भी अति प्राचीन मानी जाती है और यह भी हजारों लोगों की आस्था का केंद्र है.
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