भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस साल 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं. ऐसे में बाजार में राखियों की खरीदारी तेज होने लगी है, लेकिन सिर्फ डिजाइन व उसकी खूबसूरती देखकर राखी खरीदने के बजाय बहनों को इसके धागे, सामग्री और पारंपरिक महत्व पर भी ध्यान देना चाहिए. आइए जानते हैं राखी खरीदते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
रेशम और सूती धागे वाली राखी को दें प्राथमिकता
धार्मिक परंपराओं में रेशम या सूती धागे से बनी साधारण राखी को विशेष महत्व दिया जाता हैं. इसे रक्षा सूत्र का पारंपरिक रूप माना जाता हैं. मान्यता है कि राखी का महत्व उसकी चमक-दमक या कीमत में नहीं, बल्कि बहन की शुभकामना और उसके भाव में होता है. इसलिए अगर आप भाई के लिए पारंपरिक राखी खरीद रही हैं तो मुलायम रेशमी, सूती धागे वाली राखी बेहतर विकल्प हो सकती है.
बहुत भारी और चुभने वाली राखी से बचें
बाजार में मोती, प्लास्टिक और बड़े सजावटी सामान से बनी डिजाइनर राखियां भी उपलब्ध हैं. हालांकि खरीदारी करते समय यह देखना जरूरी है कि राखी पहनने में आरामदायक हो. बहुत भारी, नुकीले या चुभने वाले सजावटी हिस्सों वाली राखी कलाई में परेशानी पैदा कर सकती है. बच्चों के लिए छोटी, हल्की और सुरक्षित सामग्री से बनी राखी चुनना ज्यादा सही रहेगा.
प्लास्टिक की जगह पर्यावरण के अनुकूल राखी
इस बार खरीदारी के दौरान कॉटन, रेशम, जूट, बीज, कागज या अन्य प्राकृतिक सामग्री से बनी इको-फ्रेंडली राखियों को भी प्राथमिकता दी जा सकती है. इससे त्योहार की परंपरा के साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखा जा सकेगा. कई बहनें घर पर ही धागे और सजावटी सामग्री से राखी बनाना भी पसंद करती हैं.
रंग और सामग्री से ज्यादा जरूरी है भावना
रक्षाबंधन का पर्व केवल एक धागा बांधने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के साथ खड़े रहने के संकल्प का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उसकी दीर्घायु और मंगलमय जीवन की कामना करती है. इसलिए राखी खरीदते समय सबसे जरूरी बात यह है कि वह आरामदायक, सुरक्षित और परंपरा के अनुकूल हो.
(GNT इंटर्न अनुष्का रस्तोगी की रिपोर्ट)