सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस पूरे महीने में लाखों लोग व्रत रखते हैं, मंदिर जाते हैं और खास तौर पर सात्विक भोजन करते हैं. परंपराओं के अनुसार इस पवित्र महीने के दौरान कुछ खास चीजों को खाने से बचा जाता है.
इसके पीछे केवल धार्मिक कारण नहीं है, बल्कि मौसम और सेहत से जुड़े कारण भी बताए जाते हैं. दरअसल बारिश के मौसम में इंसान का डाइजेशन सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, इसलिए इस दौरान हल्का और साफ भोजन खाने की सलाह दी जाती है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि सावन में किन चीजों से दूरी बनाई जानी चाहिए?
बारिश के मौसम में पालक, मेथी और दूसरी पत्तेदार सब्जियों में कीड़े और गंदगी होने का खतरा बढ़ जाता है. इन्हें पूरी तरह साफ करना आसान नहीं होता, इसलिए कई लोग सावन में इन्हें नहीं खाते.
सावन में ज्यादातर लोग सात्विक भोजन करते हैं. इसी वजह से प्याज और लहसुन से परहेज किया जाता है. माना जाता है कि ये मन को शांत रखने वाली सात्विक जीवनशैली का हिस्सा नहीं हैं.
सावन भगवान शिव की पूजा का महीना माना जाता है. इसलिए बहुत से लोग इस समय मांस, मछली और अंडे नहीं खाते. बारिश के मौसम में इन चीजों के जल्दी खराब होने का खतरा भी रहता है. मछलियों के लिए यह प्रजनन काल भी होता है, इसलिए उन्हें न खाने की परंपरा भी है. सावन में शरीर और मन की शुद्धता पर जोर दिया जाता है. इसी कारण शराब से पूरी तरह दूरी रखने की सलाह दी जाती है.
पकौड़े, समोसे जैसी तली हुई चीजें और कुछ खमीर वाले भोजन बारिश के मौसम में पचने में भारी हो सकते हैं. इसलिए इन्हें कम खाने की सलाह दी जाती है.
सावन में ताजा, हल्का और घर का बना खाना सबसे अच्छा माना जाता है. फल, दूध, दही (कुछ परंपराओं में दही से भी परहेज किया जाता है), साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, मखाना और उबले आलू जैसे सात्विक भोजन शरीर को एनर्जी देने के साथ पाचन पर भी कम असर डालते हैं.