Muzaffarpur Garibnath
Muzaffarpur Garibnath
उत्तर बिहार का सबसे बड़ा शिवधाम... जहां सावन में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ता है. एक ऐसा मंदिर, जिसके नाम के पीछे जुड़ी है एक गरीब शिवभक्त की मार्मिक कहानी और भगवान शिव के चमत्कार की अद्भुत मान्यता है. आखिर कैसे पड़ा इस धाम का नाम बाबा गरीबनाथ? क्यों हर साल लाखों कांवरिये 82 किलोमीटर पैदल चलकर यहां जल चढ़ाने आते हैं? आइए जानते हैं...
मुजफ्फरपुर का बाबा गरीबनाथ धाम आज उत्तर बिहार की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. कहानी करीब दो सौ साल पुरानी बताई जाती है. कपड़ा मंडी में मुंशीगिरी करने वाले एक गरीब शिवभक्त की बेटी का गौना होना था. घर की आर्थिक हालत इतनी खराब थी कि आभूषण तक बिक चुके थे. कोई रास्ता नहीं बचा तो वह रोज की तरह भगवान शिव के सामने अपनी व्यथा सुनाकर मंदिर में ही सो गया.
उधर घर में पति-पत्नी ने बेटी का गौना कराने के लिए अपना मकान बेचने का फैसला किया. लेकिन जब रजिस्ट्री नहीं हो सकी और वे निराश होकर घर लौटे, तो वहां ऐसा दृश्य था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी. जरूरत का पूरा सामान पहले से घर में रखा मिला. गरीब शिवभक्त ने इसे भगवान शिव का चमत्कार माना और भाव-विभोर होकर 'गरीबों के नाथ- गरीबनाथ' कहते हुए मंदिर पहुंच गया. तभी से भगवान शिव यहां बाबा गरीबनाथ के नाम से प्रसिद्ध हो गए.
मंदिर के प्रधान पुजारी बताते हैं कि करीब 200 वर्ष पहले यहां घना जंगल हुआ करता था. जंगल की सफाई के दौरान एक विशाल बरगद का पेड़ काटा जा रहा था, तभी उसकी जड़ों से लाल रंग का द्रव निकलने लगा. इसे चमत्कार मानकर कटाई रोक दी गई. उसी रात भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर उस स्थान की खुदाई कराने का निर्देश दिया. अगले दिन खुदाई में शिवलिंग प्रकट हुआ और तभी से यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई.
पूरी होती है हर मन्नत
गरीब शिवभक्त की मनोकामना पूरी होने की कथा दूर-दूर तक फैल गई. यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा गरीबनाथ के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता. श्रद्धालु बताते हैं कि बाबा की कृपा से उनकी बिगड़ी से बिगड़ी जिंदगी भी संवर गई. कई लोग वर्षों से लगातार यहां आकर सेवा और पूजा करते हैं.
सावन के महीने में बाबा गरीबनाथ धाम की रौनक देखते ही बनती है. लाखों कांवरिये पहलेजा घाट, हाजीपुर से गंगाजल लेकर करीब 82 किलोमीटर की पैदल यात्रा तय करते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं. यह यात्रा उत्तर बिहार की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शुमार है. पिछले साल श्रावणी मेले में करीब 20 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक किया था. इस बार यह संख्या 25 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है. श्रद्धालुओं की सेवा के लिए मंदिर न्यास समिति ने 3300 स्वयंसेवकों की तैनाती की है, जबकि जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं.
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